नयी दिल्ली, 29 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में ‘एल्डरमैन’ को नामित करने के उपराज्यपाल के अधिकार को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर इस सप्ताह फैसला सुना सकता है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 17 मई को मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना एमसीडी के सदस्यों को नामित करने के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के फैसले के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एमसीडी की महापौर शेली ओबेरॉय की एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए यह घोषणा की। याचिका में नगर निगम की स्थायी समिति को कार्य करने देने की अनुमति मांगी गई थी।
प्रधान न्यायाधीश ने महापौर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से कहा, ‘‘सिंघवी, कृपया शुक्रवार तक प्रतीक्षा करें, फैसला सुनाया जा सकता है। हम इस (मौजूदा याचिका) पर सोमवार को गौर करेंगे।’’
एमसीडी की महापौर ने अपनी याचिका में कहा है कि नगर निगम की स्थायी समिति कई महत्वपूर्ण कार्य करती है और स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना सहित पांच करोड़ रुपये के व्यय वाले किसी भी निर्णय को इसके माध्यम से पारित किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि एमसीडी की स्थायी समिति वर्तमान में काम नहीं कर रही है और समिति में 18 सदस्य हैं, जिनमें से छह सदस्य सीधे नगर निकाय द्वारा चुने जाते हैं। शेष 12 सदस्यों को एक निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, जिसमें 10 सदस्य या एल्डरमैन शामिल होते हैं जिन्हें उपराज्यपाल द्वारा नामित किया जाता है। इस मुद्दे पर पहले की याचिका पर निर्णय लंबित है।
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