पत्रकार की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका पर जम्मू कश्मीर सरकार से जवाब मांगा
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श्रीनगर, 24 अप्रैल जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने पत्रकार गौहर गिलानी के विरूद्ध अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज की गयी प्राथमिकी को खारिज करने की उनकी मांग संबंधी याचिका पर शुक्रवार सरकार का रुख जानना चाहा।

न्यायमूर्ति अली मोहम्मद ने सरकार को नोटिस जारी कर उससे अपना रुख बताने को कहा एवं अगली सुनवाई की तारीख 20 मई से पहले पत्रकार की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

गिलानी ने वकील सालिह पीरजादा के माध्यम से याचिका दायर की है। पीरजादा ने अपने मुवक्किल के विरूद्ध मामला दर्ज करने एवं साइबर थाने के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया है तथा गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण एवं प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है।

कश्मीर जोन के साइबर थाने ने मंगलवार को गिलानी के विरूद्ध मामला दर्ज किया था और उन पर सोशल मीडिया पोस्टों के जरिए अवैध गतिविधि शामिल होने का आरोप लगाया है।

पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि थाने को भरोसेमंद सूत्र से यह जानकरी मिली कि गौहर गिलानी नामक एक व्यक्ति अपने पोस्टों के माध्यम से अवैध गतिविधि में शामिल है और सोशल मीडिया मंच पर उसके पोस्ट भारत की राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं सुरक्षा के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं।

प्रवक्ता के अनुसार अवैध गतिविधियों में कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना, देश के प्रति असंतोष पैदा करने, लोगों के दिमाग में डर पैदा करना है ।

स्वतंत्र पत्रकार गिलानी अतीत में जर्मन प्रसारक ड्यूचे वेली के लिए काम कर चुके है।

प्रवक्ता के अनुसार गिलानी के खिलाफ डराने धमकाने की कई शिकायतें भी मिली हैं।

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