इस बीच, इजराइल के एक पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट ने कहा, ‘‘हम जार्डन घाटी के बगैर भी अपनी सीमा की रक्षा कर सकते हैं और जो कोई कह रहा है कि सुरक्षा के लिये यह जरूरी है, वह लोगों से झूठ बोल रहा है।’’
यूएई के राजदूत युसूफ अल ओताइबा, अरब जगत के उन तीन राजदूतों में शामिल हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जनवरी में पश्चिम एशिया योजना पेश किये जाने के कार्यक्रम में शरीक हुए थे। यह योजना इजराइल को वेस्ट बैंक के करीब 30 प्रतिशत हिस्से को अपने इलाके में मिलाने की अनुमति देती है। हालांकि, इसे फलीस्तीनियों ने फौरन ही खारिज कर दिया था।
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उल्लेखनीय है कि वेस्ट बैंक पश्चिम एशिया के भूमध्य सागर तट के पास स्थित एक भू-आबद्ध क्षेत्र है।
इजराइल के येदीयोत अहारोनोत अखबार में प्रकाशित एक संपादकीय में अल ओताइबा ने चेतावनी दी है कि जार्डन घाटी और अन्य इलाकों को अपने इलाके में मिलाने की इजराइल की प्रस्तावित योजना हिंसा भड़काएगी और चरमपंथ को बढ़ावा देगी।
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समझा जाता है कि यह प्रक्रिया एक जुलाई से शुरू हो सकती है।
ओताइबा ने लिखा, ‘‘यह पूरे क्षेत्र को हिला कर रख देगा, खासतौर पर जार्डन को, जिसकी स्थिरता से पूरे क्षेत्र को और खासतौर पर इजराइल को फायदा होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह अरब जगत और यूएई के साथ सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संबंधों को बेहतर करने की इजराइल की आकांक्षाओं पर निश्चित तौर पर तुरंत पानी फेर देगा।’’
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जार्डन घाटी को अपने इलाके में मिलाने का संकल्प लिया है, यह क्षेत्र वेस्ट बैंक का करीब एक चौथाई हिस्सा है।
वहीं, अरब देशों ने ट्रंप प्रशासन की कोशिशों का स्वागत किया, लेकिन इस योजना को खारिज कर दिया तथा 1967 की तर्ज पर द्विराष्ट्र के सिद्धांत का समर्थन किया।
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