नयी दिल्ली, 29 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो सैफुद्दीन सोज की कथित नजरबंदी को लेकर दायर याचिका का बुधवार को निस्तारण कर दिया।
इससे पहले, जम्मू कश्मीर प्रशासन ने न्यायालय से कहा कि सोज कभी भी नजरबंद नहीं थे।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने जम्मू कश्मीर प्रशासन के बयान को रिकार्ड में शामिल करके सोज की पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया।
प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि सैफुद्दीन सोज के आने जाने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।
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सोज की पत्नी मुमताजुन्निसा सोज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा, ‘‘अगस्त के महीने में एक दिन आप मुझे नजरबंद करते हैं और अब अपने जवाबी हलफनामे में वे कहते हैं कि मैं आजाद व्यक्ति हूं।’’
इस पर पीठ ने कहा कि जिस अवधि में सोज के नजरबंद होने की बात कही जा रही है, उस दरम्यान उन्होंने बाहर भी यात्रा की है।
सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस के यह वरिष्ठ नेता बीमार थे और सिर्फ इलाज के सिलसिले में उन्होंने यात्रा की थी।
इस पर पीठ ने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रशासन का कहना है कि सोज के लिये कभी भी कोई नजरबंदी आदेश जारी ही नहीं किया गया और इसलिए जवाबी हलफनामे के मद्देनजर इस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने सोज की पत्नी की याचिका पर आठ जून को जम्मू कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगा था। इस याचिका मे पिछले साल पांच अगस्त से सोज को नजरबंद किये जाने को चुनौती दी गयी थी।
अनूप
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