रांची, 23 अप्रैल झारखंड उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया,
राज्य सरकार और अन्य संबद्ध पक्षों से पूछा है कि राज्य के आम वकीलों को
लॉकडाउन के दौरान क्या मदद दी गयी है और उन्हें मदद देने के लिए क्या
कदम उठाये गये हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन एवं न्यायमूर्ति सुजीत
नारायण प्रसाद की खंड पीठ ने झारखंड सरकार से पूछा है कि क्या उच्च
न्यायालय और निचली अदालतों के वकीलों के लिपिकों की मदद के लिए कोई
कानून बनाया गया है?
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की अगली तिथि तय करते
हुए राज्य सरकार से ऐसे किसी कानून का विवरण देने को कहा है और यह भी
बताने को कहा है कि ऐसे लिपिकों और वकीलों की मदद के लिए राज्य सरकार ने
लॉकडाउन के काल में क्या कदम उठाये हैं।
न्यायालय ने इस सिलसिले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी जवाब तलब किया है।
इससे पूर्व यहां झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने जरूरतमंद
वकीलों को पांच-पांच हजार रुपये की सहायता दी थी।
न्यायालय ने कहा कि इस सिलसिले में न्यायालय में दाखिल सभी याचिकाओं का
मूल उद्देश्य लॉकडाउन के कारण मुश्किल का सामना कर रहे वकीलों एवं उनके लिपिकों को मदद पहुंचाना है।
इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
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