रांची, 23 जुलाई झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने में नाकाम रहने के लिए मंगलवार को राज्य सरकार की आलोचना की।
अदालत ने कहा कि अगर सरकार रिम्स को सुविधाएं और उपकरण प्रदान नहीं कर सकती तो इसे बंद कर देना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में बार-बार विफल रही है।
अदालत ने कहा, "सरकार के हलफनामों और अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के उसके दावों से ऐसा लगता है कि हम किसी दूसरे देश में हैं। हालांकि, वास्तविकता कुछ और ही है।"
पीठ ने कहा, "रिम्स में सुविधाओं की कमी के कारण मरीज निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में जाने को विवश हैं। इनमें से अधिकांश चिकित्सा केंद्रों के पास क्लिनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत आवश्यक उचित लाइसेंस नहीं हैं।"
मामले की एक पखवाड़े के बाद दोबारा सुनवाई होगी।
न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ज्योति शर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें रिम्स में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है।
रिम्स, झारखंड सरकार के तहत संचालित स्वायत्त संस्थान है।
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