इंदौर (मध्यप्रदेश), 30 जुलाई देश में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध के महीने भर बाद आवासन और शहरी कार्यों के केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर ने शनिवार को कहा कि ऐसे प्लास्टिक के खिलाफ देश में जन आंदोलन की जरूरत है, क्योंकि इस पर लगाई गई पाबंदी का पालन जनता को ही करना है।
गौरतलब है कि सरकार ने देश में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर एक जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया है। आवासन और शहरी कार्यों के राज्यमंत्री का ध्यान इंदौर में संवाददाताओं ने इस ओर खींचा था कि बाजार में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के सस्ते और टिकाऊ विकल्पों का अभाव है।
इसकी प्रतिक्रिया में किशोर ने कहा,‘‘एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक पर रोक सरकार ने लगाई है, लेकिन इस प्रतिबंध को जनता को मानना है। लिहाजा इस तरह के प्लास्टिक के खिलाफ जन आंदोलन की जरूरत है, तभी हम इसके उपयोग को रोक पाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर कपड़े और कागज की थैलियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
किशोर, सरकार के आयोजित ‘‘स्वनिधि महोत्सव’’ के तहत उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके परिवारों के सम्मान के लिए इंदौर आए थे जिन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत कर्ज लेकर अपने व्यापार और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में करीब 41 लाख रेहड़ी-पटरी विक्रेता ऋण का आवेदन कर चुके हैं, जिनमें से 25 लाख से ज्यादा आवेदकों को कर्ज दिया जा चुका है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी में लोकार्पित बायो-सीएनजी संयंत्र ‘‘गोबर-धन’’ की तर्ज पर सरकार देश भर में इकाइयां लगाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि इन संयंत्रों से प्रदूषण कम होगा और पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी। किशोर ने कहा,‘‘ऐसी इकाइयों द्वारा गोबर खरीदने से पशुपालक किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी।"
हर्ष
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