Bohag Bihu 2026 Wishes in Hindi: असम का सबसे प्रमुख त्योहार बोहाग बिहू (Bohag Bihu), जिसे रोंगाली बिहू (Rongali Bihu) के नाम से भी जाना जाता है, इस वर्ष 14 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है. हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार, यह दिन बैसाख महीने (Baisakh Month) की शुरुआत और सौर नव वर्ष का प्रतीक है. मेष संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह उत्सव न केवल नई फसल की खुशी लेकर आता है, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी माध्यम है.
बोहाग बिहू का उत्सव असम में पूरे एक सप्ताह तक चलता है. इन सात दिनों को 'हत बिहू' कहा जाता है और प्रत्येक दिन का अपना विशिष्ट महत्व है:
- पहला दिन (गोरू बिहू): यह दिन पशुधन को समर्पित होता है. ग्रामीण अपने मवेशियों को नदी में नहलाते हैं और उनकी पूजा करते हैं.
- दूसरा दिन (मनुह बिहू): इस दिन लोग नए वस्त्र पहनते हैं, बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं.
- तीसरा दिन (गोसाई बिहू): यह दिन देवी-देवताओं की उपासना के लिए निर्धारित है.
इसके बाद के दिनों में कुटुंब बिहू, मेले बिहू और चेरा बिहू जैसे चरण आते हैं, जिनमें सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.
आधुनिक समय में बोहाग बिहू के इस पारंपरिक उत्सव को डिजिटल माध्यमों से भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp और Instagram पर बिहू स्टिकर्स, एचडी वॉलपेपर्स और जीआईएफ (GIF) ग्रीटिंग्स के जरिए दूर बैठे अपने प्रियजनों को 'बिहू की शुभकामनाएं' भेजकर नव वर्ष की बधाई देते हैं.





बोहाग बिहू के दौरान ही भारत के विभिन्न राज्यों में समान भावना के साथ अन्य त्यौहार मनाए जाते हैं. यह विविधता में एकता का प्रतीक है. इस पर्व को पंजाब और हरियाणा में बैसाखी, तमिलनाडु में पुथांडु, बिहार में जुड़ शीतल और ओडिशा में पना संक्रांति के तौर पर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. रोंगाली बिहू मुख्य रूप से खुशियों (Rong means Joy) का त्योहार है. इस दौरान पुरुष और महिलाएं अपने पारंपरिक परिधान पहनकर ढोल, ताल, पेपा (भैंस के सींग से बना वाद्ययंत्र) और बांसुरी की थाप पर प्रसिद्ध बिहू नृत्य करते हैं.
लोक मान्यताओं के अनुसार, बिहू के दौरान ढोल की गर्जना इंद्र देव को प्रसन्न करती है, जिससे अच्छी वर्षा होती है और फसलों की पैदावार बढ़ती है. किसान अपनी रबी की फसल कटने की खुशी में ईश्वर को अनाज अर्पित करते हैं और नारियल, चावल, तिल व दूध से बने पारंपरिक पकवान जैसे पीठा और लरु (Laru) साझा करते हैं.













QuickLY