देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर आतंकी हमला: युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान उच्चायोग के पास किया प्रदर्शन

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ यहां पाकिस्तान उच्चायोग के निकट विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कई कार्यकर्ताओं को सोमवार को हिरासत में ले लिया गया।

एक प्रदर्शनकारी ने 'पीटीआई वीडियो' को बताया, “आतंकवादियों ने निर्दोष और निहत्थे लोगों को मार डाला। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हर युवा कांग्रेस सदस्य और हर भारतीय इस आतंकी हमले में जान गंवाने वालों के लिए न्याय चाहता है। आतंकवाद को कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए।"

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी वरुण पांडे सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने तीन मूर्ति चौक से पाकिस्तान उच्चायोग तक मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था, लेकिन कार्यकर्ता सभी अवरोधकों को पार कर पाकिस्तान उच्चायोग के करीब पहुंच गए, जहां से उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

इस बीच, आईवाईसी ने एक बयान जारी कर कहा कि संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में चिब ने पहलगाम हमले को समाज में घृणा और आतंक फैलाने के लिए किया गया एक भयावह अपराध बताया।

बयान में चिब के हवाले से कहा गया, "भारत प्रेम और भाईचारे का देश है। यहां नफरत या आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।"

आईवाईसी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि हमले के पांच दिन बाद भी पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान पूर्णम साहू का मामला भी उठाया, जिन्हें 23 अप्रैल को गलती से सीमा पार करने के बाद पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया था। उन्हें अभी तक पाकिस्तान ने रिहा नहीं किया है। साहू के परिवार के लिए चिंता व्यक्त करते हुए चिब ने सरकार से आग्रह किया कि वे तेजी से कार्रवाई करें और उन्हें सुरक्षित वापस लाएं।

चिब ने कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमले केवल इसलिए होते हैं क्योंकि आतंकवादी समूहों को पाकिस्तानी से खुला समर्थन मिलता है।

चिब ने बयान में कहा, "हम इस हमले का कड़ा जवाब चाहते हैं। अब आतंकवाद के खिलाफ सीधे और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, न कि सिर्फ कूटनीति।"

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