देश की खबरें | भारत की प्राचीन परंपरा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का सटीक उदाहरण है आईटीईआर टोकामैक : प्रधानमंत्री मोदी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सूर्य के ऊर्जा स्रोत की नकल करने के लक्ष्य से शुरू की गई बहुराष्ट्रीय परियोजना ‘इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरीमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर)’ प्राचीन भारतीय सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का सटीक उदाहरण है।

दुनिया के सबसे बड़े नाभिकीय संलयन उपकरण आईटीईआर को एसेम्बल करने का काम मंगलवार को फ्रांस के सेंट-पॉल-लेज-दुरांस में शुरू हुआ और सभी ने मिलकर इसपर खुशियां मनायी।

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आईटीईआर सदस्य देशों के सभी राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष या तो मौके पर उपस्थित थे या फिर डिजिटल माध्यम से उसमें भाग लिया, कुछ ने अपने संदेश भी इस समारोह में भेजे थे।

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने इस डिजिटल कार्यक्रम की मेजबानी की।

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मोदी का संदेश फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने पढ़ा।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, ‘‘वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वैश्विक भागीदारी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आईटीईआर को प्राचीन भारतीय परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम का सटीक उदाहरण बताया.... पूरी दुनिया मानव जाति की बेहतरी के लिए साथ मिलकर काम कर रही है।’’

आईटीईआर संगठन (आईओ) परिसर के निर्माण और उसके संचालन के लिए जिम्मेदार केन्द्रीय टीम है। वहीं आईटीईआर के साझेदार अपने-अपने देशों में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए स्थानीय एजेंसियों का गठन करेंगे। आईटीईआर-भारत हमारे देश की घरेलू एजेंसी है।

आईटीईआर में साझेदार हैं.... यूरोपीय संघ, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका। मेजबान होने के नाते यूरोपीय संघ इसमें 45 प्रतिशत का योगदान देता है जबकि अन्य छह देश नौ-नौ प्रतिशत का योगदान करेंगे।

ज्यादातर योगदान आईटीईआर के लिए खरीदे गए उपकरणों के रूप में होगा।

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