देश की खबरें | इतालवी नाविकों का मामला बंद करने के केन्द्र के अनुरोध पर आदेश देने से पहले पीड़ित परिवारों को सुनेंगे: न्यायालय
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात अगस्त उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केन्द्र को स्पष्ट कर दिया कि फरवरी, 2012 में केरल तट से दूर दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने के आरोपी दो इतालवी नाविकों के मामले को बंद करने की उसकी अर्जी पर पीड़ित परिवारों का पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं दिया जायेगा जिन्हें समुचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से केन्द्र की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को यह स्पष्ट किया।

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पीठ ने केन्द्र को इस घटना में मारे गये मछुआरों के परिवार के सदस्यों को पक्षकार बनाते हुये इतालवी नाविकों का मामला बंद करने के लिये एक सप्ताह के भीतर नया आवेदन दायर करने की अनुमति दी।

सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि इटली सरकार ने भारत सरकार को यह आश्वासन दिया है कि वह कानून के अनुसार इन नाविकों पर मुकदमा चलायेगी।

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इस घटना का शिकार हुये मछुआरों के परिवारों को समुचित मुआवजा दिये जाने पर जब पीठ ने जोर दिया तो मेहता ने कहा कि केन्द्र यह सुनिश्चित करेगा की पीड़ित परिवारों को अधिकतम मुआवजा दिया जाये।

पीठ ने इन नाविकों पर मुकदमा चलाने के लिये उठाये गये इटली के कदमों की सराहना की लेकिन न्यायालय ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के लिये समुचित मुआवजे के बारे में बात कर रहा है। पीठ ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को समुचित मुआवजा दिया जाये।’’

शीर्ष अदालत ने विशेष अदालत में इतालवी नाविकों का मामला लंबित होने का जिक्र किया और सवाल किया कि वहां मुकदमा वापस लेने के लिये आवेदन के बगैर केन्द्र कैसे मामला बंद कराने के लिये यहां आ सकता है।

मेहता ने जवाब दिया कि शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि विशेष अदालत की कार्यवाही विलंबित रखी जाये।

पीठ ने कहा, ‘‘आप वहां मुकदमा वापस लेने का आवेदन कर सकते हैं। पीड़ित परिवारों को इसका विरोध करने का अधिकार है। पीड़ितों के परिवार यहां पक्षकार भी नहीं हैं। हम पीड़ित परिवारों को सुने बगैर कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।’’

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही मेहता ने दो भारतीय मछुआरों के मारे जाने की ‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’ का जिक्र किया और कहा कि पहले दो मुद्दे थे-पहला था कि क्या भारत सरकार को इन नाविकों पर मुकदमा चलाने का अधिकार है और दूसरी पीड़ितों के लिये समुचित मुआवजा।

मेहता ने हेग स्थित पंचाट की स्थाई अदालत की व्यवस्था का जिक्र किया जिसने कहा कि भारत इस मामले में मुआवजा पाने का हकदार है लेकिन वह नाविकों को प्राप्त शाासकीय छूट की वजह से उन पर मुकदमा नहीं चला सकता।

पीठ ने कहा, ‘‘आप पंचाट के फैसले के बाद यहां आये हैं। आपने इसे स्वीकार कर लिया है और आप इस पर कहीं भी सवाल नहीं उठा रहे हैं।’’

पीठ ने कहा कि इसमें एक कानूनी अड़चन है क्योंकि इसमें पर्याप्त मुआवजे का जिक्र नहीं है जो पीड़ित परिवारों को भुगतान करने के लिये जरूरी है।

मेहता ने कहा, ‘‘मैं परिवार के सदस्यों को यहां ला सकता हूं।’’सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उन्हें अधिकतम मुआवजा दिया जाये।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हमारे आदेश पारित करने से पहले भुगतान (पर्याप्त मुआवजा) होना चाहिए। आपको इस न्यायालय में चेक लाने होंगे और मामला बंद करना होगा।’’

शीर्ष अदालत ने इस मामले को अब चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया है।

केन्द्र ने तीन जुलाई को शीर्ष अदालत में इतालवी नाविकों के खिलाफ चल रही कार्यवाही बंद करने के लिये एक आवेदन दायर किया था।

केन्द्र ने कहा था कि उसने हेग स्थित पंचाट की स्थाई अदालत का 21 मई, 2020 का फैसला स्वीकार कर लिया है कि भारत इस मामले में मुआवजा पाने का हकदार है लेकिन नाविकों को प्राप्त छूट की वजह से वह इन पर मुकदमा नहीं चला सकता।

भारत ने इटली के तेल टैंकर एमवी एनरिका लेक्सी पर तैनात दो इतालवी नाविकों -सल्वाटोरे गिरोने और मैस्सीमिलियानो लटोरे- पर भारत के आर्थिक क्षेत्र में 15 फरवरी 2012 को मछली पकड़ने वाली नौका में सवार दो भारतीय मछुआरों की गोली मार कर हत्या करने का आरोप लगाया था।

इन इतावली नाविकों के खिलाफ मछली पकड़ने वाली नौका ‘सेंट एंटनी’ के मालिक फ्रेडी ने शिकायत दर्ज करायी थी कि इन नाविकों द्वारा गोली चलाये जाने के कारण केरल के दो मछुआरों की मौत हो गयी है।

अनूप

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