देश की खबरें | सामाजिक सुरक्षा से जुडी योजनाओं को रेवडी बताना गलत है : गहलोत

जयपुर, 15 अगस्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘रेवड़ी’’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि सामाजिक सुरक्षा से जुडी योजनाओं को रेवड़ी बताना गलत है।

गहलोत ने कहा कि गरीबों, बुजुर्गों, विधवाओं, नि:शक्तजनों के लिये चलाई जा रही लोक कल्याणकारी योजना को लागू करना सरकार का कर्त्तव्य है और मैं उसको ‘रेवड़ी कल्चर’ नहीं मानता हूं।

गहलोत ने कहा, ‘‘सामाजिक सुरक्षा मेरा मुख्य ध्येय है… आज दुनिया के विकसित देशों में गरीबों को, बुर्जगों को सबको साप्ताहिक पैसा मिलता है… जिंदा रहने का हक सबको है, और सरकार का यह कर्त्तव्य है कि कल्याणकारी योजना लागू करे।’’

मुख्यमंत्री ने 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सवाई मान सिंह स्टेडियम में राज्य स्तरीय ध्वजारोहण समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अभी थोडे़ दिन से चल पड़ा है ‘‘रेवड़ी कल्चर’’ .. मैं उसको रेवड़ी कल्चर नहीं मानता हूं, ये तमाम कल्याकारी योजनाएं जो गरीबों, बुजुर्गों, विधवाओं और नि:शक्तजनों के लिये है मैं उन योजनाओं को रेवड़ी कल्चर नहीं मानता हूं ।’’

उन्होंने कहा कि आज राजस्थान में हम लगभग एक करोड़ लोगों को पेंशन दे रहे हैं जो हिन्दुस्तान में कहीं अन्यत्र नहीं है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को रेवडी संस्कृति के लिये चेताते हुये इसे खतरनाक बताया था ।

उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) कहा था कि यह देश के विकास के लिये ‘‘बहुत खतरनाक’’ हो सकता है। केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय को इस इस मुद्दे पर गौर करने और 11 सदस्यीय समिति गठित करने का भी सुभाव दिया था।

जालोर में एक दलित छात्र की कथित तौर पर एक स्कूल शिक्षक द्वारा पिटाई के बाद हुयी मौत की पृष्ठभूमि में गहलोत ने दलितों और आदिवासी समुदायों के खिलाफ भेदभाव के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘‘धर्म के नाम पर जो मुल्क बनाने की बाते करते है उनको मैं कहना चाहूंगा कि पाकिस्तान का उदाहरण आपके सामने है । धर्म के नाम पर उस वक्त मजबूरी में अगल राष्ट्र बनाना पड़ा । पाकिस्तान में लोकतंत्र की हत्या हुयी और एक धर्म होते हुए भी मुल्क के दो टुकडे़ हो गये।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘छुआछूत मानवता पर कलंक है.. मैं उम्मीद करता हूं कि धर्म के नाम पर बात करने वाले इस पर ध्यान देंगे कि आप धर्म की बात तो करते हो मतलब आज ऊंच नीच, दलित, आदिवासी, पिछडे वर्ग की बात आती है तो आपको सोचना पडे़गा कि उन लोगों के लिये भी किस प्रकार से ऊंच नीच का भेदभाव खत्म हो, छुआछूत खत्म हो उसके लिये आपको अभियान चलाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपको आह्वान करना चाहिए कि अगर आप धर्म के नाम पर राष्ट्र बनाने की तो छुआछूत और भेदभाव के कलंक तो मिटाओ कम से कम।’’

उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस पर अपील की है कि हमें मिलकर आदिवासियों, दलितों के साथ भेदभाव को खत्म करना होगा। राज्य सरकार की मूल भावना भी सभी को समान अधिकार प्रदान करने की है।

उन्होंने कहा कि देश में अलग अलग बोलने वाले, अलग अलग धर्मो में आस्था रखने वाले लोगों के होने के बावजूद भारतीय संविधान की मूल भावना ने इसे 75 साल से एकजुट रखा है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)