चेन्नई, 11 जून तमिलनाडु में 10 जुलाई को होने वाले विक्रावांडी विधानसभा उपचुनाव में विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) अपनी मजबूत उपस्थिति के कारण कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) की भरोसेमंद सहयोगी विदुथलाई चिरूथईगल काची (वीसीके), एआईएडीएमके की जीत की संभावनाओं को बिगाड़ सकती है।
डीएमके के साथ गठबंधन करने वाली वामपंथी पार्टियों की भी इस निर्वाचन क्षेत्र में उल्लेखनीय उपस्थिति है। एआईएडीएमके का चुनावी मैदान में अकेले रहना फायदेमंद नहीं दिख रहा है।
यह देखना बाकी है कि क्या एआईएडीएमके पार्टी डीएमके से मुकाबला करने की घोषणा करेगी या 2026 के विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इससे दूर रहना पसंद करेगी। उपचुनाव का फैसला आमतौर पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में रहता है और डीएमके को इस सीट पर आसान जीत मिलने की संभावना है।
पड़ोसी विल्लुपुरम जिले की विक्रावांडी विधानसभा सीट दक्षिण के पांच राज्यों में एकमात्र निर्वाचन क्षेत्र है जहां दस जुलाई को मतदान होगा।
इस साल अप्रैल में डीएमके विधायक एन पुगाझेंथी की मृत्यु के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। उन्होंने 2021 के चुनावों में इस सीट से एआईएडीएमके के आर मुथमिलसेल्वन को हराकर जीत हासिल की।
कांग्रेस के एक सूत्र के अनुसार, पार्टी इस सीट पर दावा नहीं करेगी क्योंकि यह सीट डीएमके ने जीती है।
उन्होंने कहा, "इसलिए स्वाभाविक रूप से डीएमके को यहां से चुनाव लड़ना चाहिए, ठीक उसी तरह से जैसे लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने विलावलनकोड सीट पर जीत दर्ज की। "
पीएमके द्वारा अपनी सहयोगी भाजपा को यह सीट देने की संभावना नहीं है, क्योंकि वन्नियार बहुल इस पार्टी की इस जिले में मजबूत उपस्थिति है।
इस बीच तमिल राष्ट्रवादी पार्टी (एनटीके) ने उपचुनाव लड़ने की घोषणा की है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)










QuickLY