नयी दिल्ली, चार जून कावासाकी रोग से पीड़ित इराक का दो साल के बच्चे को, जिसका हृदय महज 25 फीसदी काम कर रहा था, गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में पांच घंटे की जटिल सर्जरी के बाद नया जीवन दिया गया।
इराकी कुर्दिस्तान के बच्चे में हृदय संबंधी घातक जटिलताएं विकसित हो गई थीं। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उसकी ‘कोरोनरी आर्टरी बाइपास ग्राफ्ट (सीएबीजी) सर्जरी’ की गई।
अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कावासाकी रोग, जिसे ‘म्यूकोक्यूटेनियस लिम्फ नोड सिंड्रोम’ के नाम से भी जाना जाता है, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करने वाली एक घातक बीमारी है, जिसमें रक्त वाहिकाओं में सूजन की शिकायत सताती है और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
बयान के अनुसार, कावासाकी रोग में हृदय संबंधी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं और प्रभावित बच्चों में से लगभग पांच फीसदी में हृदय में रक्त का प्रवाह करने वाली धमनी बेहद संकरी हो जाती है।
बयान में कहा गया है कि बच्चा जब आठ महीने का था, तब उसके कावासाकी रोग से पीड़ित होने की बात सामने आई थी। इसमें बताया गया है कि बच्चे की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई, उसे सांस लेने में तकलीफ लेने की शिकायत सताने लगी, वह जल्दी थकने लगा और खेलने-कूदने में असमर्थ हो गया।
बयान के मुताबिक, मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच में पाया कि बच्चे का हृदय महज 25 फीसदी काम कर रहा है, उसकी रक्त धमनियां बेहद संकरी या अवरुद्ध हो गई हैं और हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त मात्रा में खून की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
बयान के अनुसार, मेदांता अस्पताल में कार्डियक केयर के हृदय शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल भान के नेतृत्व में एक टीम ने बच्चे की ‘कोरोनरी आर्टरी बाइपास ग्राफ्ट (सीएबीजी) सर्जरी’ सफलतापूर्वक की।
बयान में कहा गया है कि सर्जरी के बाद बच्चे के हृदय की कार्यक्षमता में तेजी से सुधार हो रहा है और उसकी ऊर्जा का स्तर भी बढ़ गया है। इसमें कहा गया है कि डॉक्टरों को आने वाले दिनों में बच्चे के हृदय की कार्यक्षमता में और सुधार होने तथा उसके सामान्य बचपन जीने में सक्षम होने की उम्मीद है।
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