नयी दिल्ली, 31 जुलाई सरकार ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सुधार लागू किए गए हैं और निजी कंपनियों को न केवल वाणिज्यिक बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास गतिविधियों में भी भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य "स्पेस विजन 2047" को साकार करना है, जिसमें निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी पर बल दिया गया है।
मंत्री ने कहा कि मार्च 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स में कुल 43 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश हो चुका है।
उन्होंने बताया कि इन-स्पेस (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर) ने एक ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत गैर-सरकारी संस्थाएं इसरो की तकनीक, प्रक्षेपण सुविधा और पृथ्वी अवलोकन संसाधनों तक आसान पहुंच के साथ-साथ मार्गदर्शन और तकनीक हस्तांतरण जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकती हैं।
मंत्री ने बताया कि इन-स्पेस के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 400 से अधिक गैर-सरकारी संस्थाओं ने 650 से अधिक प्रस्ताव विभिन्न प्रकार के सहयोग के लिए जमा किए हैं, जिनमें परामर्श, प्राधिकरण, तकनीक हस्तांतरण और मार्गदर्शन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक इन-स्पेस द्वारा इसरो की 93 तकनीकों का हस्तांतरण निजी संस्थाओं को किया जा चुका है। ऐसी पहल नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरिक्ष और संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश को आकर्षित कर रही हैं।
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