न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार ने आरोपियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को यह आदेश पारित किया।
उन्होंने कहा, “तथ्यों के ज्ञापन के साथ विधिवत दाखिल याचिका में बताए गए कारणों को स्वीकार किया जाता है। तदनुसार, अनुलग्नक-सीसी की मूल/प्रमाणित प्रति पेश करने से फिलहाल छूट दी जाती है।”
न्यायमूर्ति कुमार ने फैसले में कहा, “इस बीच, याचिकाकर्ताओं के खिलाफ सदाशिवनगर पुलिस थाने में दर्ज अपराध संख्या 17/2025 में आगे की सभी कार्रवाई/जांच और बेंगलुरु में एलएक्सएक्स अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश की अदालत में दायर पीसीआर संख्या 1/2025 में आगे की सभी कार्यवाही पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है।”
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के सतत प्रौद्योगिकी केंद्र में संकाय सदस्य रहे सन्ना दुर्गाप्पा की शिकायत पर 2010 से 2020 के बीच घटी विभिन्न घटनाओं को लेकर गोपालकृष्णन और 16 संकाय सदस्यों के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
दुर्गाप्पा ने दावा किया था कि 2014 में उन्हें ‘हनी ट्रैप’ मामले में झूठा फंसाया गया और बाद में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जातिसूचक गालियां और धमकियां दी गईं, क्योंकि वह आदिवासी बोवी समुदाय से आते हैं।
गोपालकृष्णन ने अपने खिलाफ दायर मामले की जांच एवं सुनवाई पर लगी रोक पर कहा, “मैंने हमेशा निष्पक्षता, न्याय और हर किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने में विश्वास किया है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि जो भी हो। मुझे गहरा दुख है कि हाशिये पर रहने वाले समुदायों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून का इस्तेमाल मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए किया गया।”
उन्होंने कहा कि वह 2022 से परिषद के अध्यक्ष के रूप में आईआईएससी से जुड़े हुए हैं, जबकि कथित घटनाएं 2014 की हैं।
गोपालकृष्णन ने कहा कि आईआईएससी के पास कार्यकारी प्रबंधन के दायरे में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए स्पष्ट नीतियां हैं।
उन्होंने कहा, “माननीय कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कल मेरे और अन्य लोगों के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आगे की सभी जांच और कार्यवाही पर रोक लगा दी। चूंकि, मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए मैं आगे कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मुझे यकीन है कि न्याय की जीत होगी।”
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