देश की खबरें | घंटी मुक्त विद्यालय से लेकर वैश्विक नागरिकता पाठ्यक्रम तक शिक्षकों ने पेश किये नवोन्मेषी विचार
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच सितंबर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से इस साल नवाजे गये 47 शिक्षकों में कई ने ‘घंटी मुक्त विद्यालय’, ‘बाल संसद’, ‘लैंगिक संवेदनशीलता अभ्यास’ और ‘वैश्विक नागरिकता पाठ्यक्रम’ जैसी नवोन्मेषी पहल पठन-पाठन में अपनाये।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को डिजिटल माध्यम से 47 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किये।

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इस साल, उम्मीदवार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जूरी के समक्ष पेश हुए और प्रस्तुतियां दीं। जूरी ने पुरस्कार के लिये 47 शिक्षकों का चयन किया।

गुजरात में श्री तिदना प्राइमरी स्कूल के शिक्षक महिपालसिंह जेतावत ने ‘घंटी मुक्त विद्यालय’ की अवधारण पेश की।

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उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल होने के लिये प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बाल-केंद्रित विद्यालय के लिये नवोन्मोषी विचारों का प्रयोग किया, जैसे कि बाल संसद, ज्ञान कुटीर बनाना, जहां बच्चे अपनी कहानी रिकार्ड करते हैं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग करना, स्थानीय प्रायोजकों के जरिये बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना और परियोजना आधारित तनाव मुक्त शिक्षा प्रदान करना । ’’

दिल्ली के माउंट आबू स्कूल की प्राचार्या ज्योति अरोड़ा ने स्कूलों में ‘वैश्विक नागरिकता पाठ्यक्रम’ पेश किया ताकि बच्चों को संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के बारे में जागरूक किया जा सके।

कांजेली प्राइमरी स्कूल के प्राचार्य प्रकाशचंद्र एन सुतार ने वैज्ञानिक अवधारणाओं को सिखाने के लिये अपनी काष्ठ कला कौशल से कम लागत में रोचक किट, प्रारूप और प्रयोग उपकरण बनाये।

मध्य प्रदेश में शिक्षक संजय जैन ने स्कूल के फर्श, दीवार और खुले स्थानों का उपयोग कर उत्साह के साथ पठन-पाठन की सामग्री उपलब्ध की।

सिक्किम के शिक्षक लोमास धुंगेल ने ज्यमिति, बीजगणित और गणितीय अवधारणाओं की कविता, किस्सागोई तथा कला के जरिये शिक्षण के लिये अनूठी पद्धति अपनाई।

गौरतलब है कि शिक्षकों से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं नामांकन आमंत्रित किया गया था। शिक्षक पुरस्कार 2020 के लिए अंतिम चयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सेवानिवृत्त सचिव के नेतृत्‍व में राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र जूरी ने किया।

जूरी ने राज्यों और संगठनों द्वारा भेजी गई उम्मीदवारों की सूची की समीक्षा की और नए सिरे से मूल्यांकन किया। इस वर्ष, उम्मीदवार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जूरी के सामने पेश हुए और प्रस्तुतियां दीं। जूरी ने 47 शिक्षकों का चयन किया।

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