नयी दिल्ली, 17 मई वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत में कई वस्तुओं पर सीमा शुल्क को गलत अर्थ में 'अक्सर' अधिक बताया जाता है लेकिन असल में वे कम हैं।
गोयल ने ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की पहली बैठक के बाद कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मदद पहुंचा रहे प्रौद्योगिकी उत्पादों पर सीमा शुल्क बहुत कम हैं।
उन्होंने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि भारत में आयात पर लगाए गए शुल्क की वास्तविक दरें असलियत में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के स्तर पर स्वीकृत दरों से कम हैं।
मंत्री ने कहा, "ज्यादातर उत्पादों, कच्चे माल, मध्यवर्ती उत्पादों पर भारत के सीमा शुल्क को अक्सर गलत अर्थ में बहुत अधिक बता दिया जाता है। लेकिन असल में ये दरें कम हैं।"
गोयल ने बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि टीटीसी भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत को सहयोग दे रही है और यह समझौता दोनों के संबंधों को इस सदी का निर्णायक साझेदारी बनाने का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत यूरोपीय संघ के कार्बन कर लगाने के कदम पर भी संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ कार्बन कर के मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश में लगे हुए हैं।
गोयल ने यूरोपीय संघ के आंतरिक व्यापार आयुक्त थिएरी ब्रेटन के साथ अलग से बैठक भी की। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने संबंधी ब्रेटन के सुझाव पर कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रमुख ताकत बन चुके भारत और यूरोपीय संघ संपर्क बढ़ा सकते हैं।
प्रेम
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY