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देश की खबरें | भारत और चीन की सेनाओं ने आठवें दौर की सैन्य वार्ता को रचनात्मक करार दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय सेना ने रविवार को कहा कि चीनी सेना के साथ लद्दाख में गतिरोध को लेकर हुई आठवें दौर की सैन्य वार्ता रचनात्मक रही और इस दौरान गहराई से एवं स्पष्ट बातचीत हुई।

देश की खबरें | भारत और चीन की सेनाओं ने आठवें दौर की सैन्य वार्ता को रचनात्मक करार दिया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ नवंबर भारतीय सेना ने रविवार को कहा कि चीनी सेना के साथ लद्दाख में गतिरोध को लेकर हुई आठवें दौर की सैन्य वार्ता रचनात्मक रही और इस दौरान गहराई से एवं स्पष्ट बातचीत हुई।

सेना ने अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र से सैन्य बलों के पीछे हटने को लेकर ठोस सफलता मिलने के कोई संकेत नहीं होने के बीच यह बयान दिया।

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भारत और चीन की सेनाओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वार्ता के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को गंभीरता से लागू करने और यह सुनिश्चित करने पर रजामंदी हुई कि सीमा पर तैनात बल संयम बरतें एवं गलतफहमी से बचें।

बीजिंग और नयी दिल्ली में जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों से वार्ता एवं संवाद बनाए रखने और पुराने मसलों के समाधान के लिए वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

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भारतीय सेना और चीन की जनमुक्ति सेना (पीएलए) के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय हिस्से में स्थित चुशुल में शुक्रवार को आठवें दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता हुई थी। यह वार्ता करीब साढ़े 10 घंटे चली थी। वार्ता में दोनों देशों की सेनाओं ने जल्द ही पुन: मुलाकात करने पर सहमति जताई थी।

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास से सेनाओं को पीछे हटाने को लेकर रचनात्मक, स्पष्ट और गहराई से बातचीत हुई।

इसमें कहा गया, ‘‘दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सर्वसम्मति को गंभीरता से लागू करने और यह सुनिश्चित करने पर सहमति बनी कि सीमा पर तैनात बल संयम बरतें और गलतफहमी से बचें।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘दोनों पक्षों ने सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों से वार्ता एवं संवाद बनाए रखने और पुराने मसलों के समाधान के लिए वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, ताकि सीमावर्ती इलाकों में शांति कायम रहे।’’

सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में टकराव के सभी बिंदुओं से चीन द्वारा बलों की शीघ्र वापसी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विवाद का समाधान खोजने को लेकर अभी कोई सफलता नहीं मिली है।

पूर्वी लद्दाख के विभिन्न पहाड़ी इलाकों में करीब 50 हजार भारतीय सैनिक शून्य से भी नीचे तापमान में युद्ध की उच्चस्तरीय तैयारी के साथ तैनात हैं। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को खत्म करने के लिए हुई कई दौर की बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

अधिकारियों के मुताबिक, चीन ने भी लगभग इतने ही सैनिक तैनात किए हैं।

दोनों पक्षों के बीच मई की शुरुआत में गतिरोध की स्थिति बनी थी।

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा था कि भारत एलएसी में कोई बदलाव स्वीकार नहीं करेगा और सीमा पर झड़पों, अतिक्रमण और बिना उकसावे की सामरिक सैन्य कार्रवाइयों के बड़े संघर्षों में बदलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

आठवें दौर की सैन्य बातचीत में भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के नवनियुक्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया था।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) नवीन श्रीवास्तव भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

सातवें दौर की बातचीत में दोनों पक्षों ने “यथाशीघ्र” सैनिकों की वापसी के परस्पर स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने के लिये सैन्य एवं कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत एवं संवाद कायम रखने पर सहमति व्यक्त की थी।

भारत का रुख शुरू से स्पष्ट है कि सैनिकों की वापसी और पहाड़ी क्षेत्र के गतिरोध वाले बिंदुओं पर तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे ले जाने का दायित्व चीन पर है।

छठे दौर की सैन्य बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने सीमा पर और सैनिकों को नहीं भेजने, जमीनी स्थिति को बदलने की एकपक्षीय कोशिश से बचने और स्थिति को और अधिक गंभीर बनाने वाले किसी भी कदम या कार्रवाई से बचने समेत कई फैसलों की घोषणा की थी।

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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 08, 2020 01:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).