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SC on Traffic Challans: बिजली बिल से जुड़ेंगे अनपेड ट्रैफिक चालान? सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा सुझाव; ₹20,000 करोड़ की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी

देश भर में पेंडिंग ट्रैफिक ई-चालानों की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर को एक अप्रत्याशित और सख्त सुझाव दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनपेड ट्रैफिक चालानों को बिजली के बिलों के साथ जोड़ने पर विचार करना चाहिए, ताकि बिल न भरने पर बिजली कटने के डर से लोग समय पर जुर्माना भरें.

SC on Traffic Challans: बिजली बिल से जुड़ेंगे अनपेड ट्रैफिक चालान? सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा सुझाव; ₹20,000 करोड़ की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी
Supreme Court (File Photo)

नई दिल्ली: देश में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद लाखों वाहन चालकों द्वारा ई-चालान का भुगतान न करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. Bar and Bench की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि डिजिटल चालान प्रणाली का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब जुर्माने की वसूली के लिए कड़े और व्यावहारिक तंत्र विकसित किए जाएंगे.

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुझाव दिया कि जो लोग बार-बार चालान भरने से बच रहे हैं, उनके जुर्माने की रकम को उनके बिजली बिल में जोड़ दिया जाए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "यदि लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं, तो इसे उनके बिजली बिल में जोड़ें. उन्हें बिजली का बिल चुकाना ही होगा, अन्यथा बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा. इस पर काम कीजिए। इस देश में आपको कोई न कोई रास्ता निकालना ही होगा." यह भी पढ़ें: Delhi Pollution Alert: दिल्ली में 1 अक्टूबर से बिना PUC दौड़ेगी गाड़ी तो कटेगा ₹10,000 का चालान; सरकार शुरू करेगी विशेष जांच अभियान

₹20,000 करोड़ का जुर्माना बकाया: "केवल चालान जारी करना काफी नहीं"

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-चालान वसूली से जुड़े आंकड़े रखे गए:

  • कुल देनदारी: देश भर में विभिन्न यातायात उल्लंघनों के तहत करीब ₹45,000 करोड़ के ई-चालान जारी हुए थे.
  • वसूली का आंकड़ा: इनमें से अब तक लगभग ₹25,000 करोड़ की ही वसूली हो सकी है, जबकि करीब ₹20,000 करोड़ की भारी राशि अब भी बकाया है.
  • न्यायमूर्ति पारदीवाला ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस लाखों ई-चालान काट सकती है, लेकिन जब तक जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर वसूली की मजबूत प्रक्रिया नहीं बनेगी, तब तक सड़कों पर अनुशासन नहीं लाया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए उन्हें बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया है. 

चालान न भरने वालों पर लगेंगी कई प्रशासनिक पाबंदियां

सुप्रीम कोर्ट ने केवल बिजली बिल ही नहीं, बल्कि वाहन पोर्टल पर कई जरूरी नागरिक सेवाओं को ब्लॉक करने का भी खाका पेश किया:

  • परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्टिंग: अदालत ने सुझाव दिया कि जिन वाहनों पर लंबे समय से चालान लंबित हैं, उन्हें केंद्रीय 'वाहन' (Parivahan) पोर्टल पर फ्लैग या ब्लैकलिस्ट किया जाए.
  • दस्तावेजों पर रोक: जब तक बकाया चालान जमा न हो, तब तक आरसी (RC) रिन्यूअल, डुप्लीकेट आरसी जारी करने, वाहन का स्वामित्व ट्रांसफर करने (Ownership Transfer) और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर पूर्ण रोक लगाई जा सकती है.
  • ड्राइविंग लाइसेंस और PUC ब्लॉक: चालान डिफॉल्टरों के ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने और पुराने लाइसेंस को निलंबित करने के साथ-साथ पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी न करने का भी सुझाव दिया गया.
  • वाहन जब्ती (Impounding): सड़कों पर औचक चेकिंग (Random Checks) के दौरान यदि किसी वाहन पर भारी संख्या में पुराने चालान बकाया पाए जाएं, तो मौके पर ही वाहन को जब्त करने की सिफारिश की गई.

14 साल पुरानी पीआईएल पर सुनवाई: आदेशों की स्थिति रिपोर्ट तलब

यह मामला कोयंबटूर के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजासेकरन द्वारा 2012 में दायर की गई ऐतिहासिक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है:

  • इस याचिका का उद्देश्य देश में सड़क हादसों और मौतों को कम करने के लिए संस्थागत सुधार, कड़े नियम और बेहतर इमरजेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है.
  • पीठ ने इस बात पर असंतोष जताया कि पिछले 14 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सड़क सुरक्षा पर जारी किए गए तमाम दिशा-निर्देशों का राज्यों में जमीनी स्तर पर कितना पालन हुआ है, इसका सही मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है.
  • अदालत ने मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को निर्देश दिया कि वे अब तक के सभी न्यायिक आदेशों, उनके क्रियान्वयन की तय समय-सीमा और राज्यों द्वारा अनुपालन की वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाला एक विस्तृत स्टेटस चार्ट तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2026 08:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).