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Jaipur Dussehra 2026: जयपुर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मथुरा के मुस्लिम कलाकारों ने बनाई 105 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा; VIDEO

जयपुर में विजयादशमी (दशहरा) के पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच, शहर में गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली है.

Jaipur Dussehra 2026: जयपुर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मथुरा के मुस्लिम कलाकारों ने बनाई 105 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा;  VIDEO
(Photo Credits ANI)

Jaipur Dussehra 2026:  राजस्थान की राजधानी जयपुर में विजयादशमी (दशहरा) के पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच, शहर में गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली है. उत्तर प्रदेश के मथुरा से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम कलाकारों का एक परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से जयपुर में रावण के विशालकाय पुतले तैयार करता आ रहा है. इस साल भी इस कारीगर परिवार ने कड़ी मेहनत के बाद 105 फीट ऊंचे रावण का पुतला तैयार किया है, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है.

पांच पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे मुख्य कारीगर चांद बाबू ने अपनी इस पुश्तैनी विरासत के बारे में मीडिया से बात की. उन्होंने बताया कि उनके परिवार की यह पांचवीं पीढ़ी है जो इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है. चांद बाबू के अनुसार, उनके दादाजी ने सबसे पहले जयपुर में केवल 20 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया था, समय के साथ इस कला को विस्तार मिला और आज उनकी यह टीम 105 फीट ऊंचे भव्य रावण का निर्माण कर रही है. यह परिवार हर साल विशेष अवसरों और दशहरे के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करने यहां आता है.

मुस्लिम  परिवार ने बनाई 105 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा

पारंपरिक सामग्रियों का होता है उपयोग

इस विशालकाय पुतले को तैयार करने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत भरी होती है. कारीगरों द्वारा इसमें आधुनिक सामग्रियों की जगह पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. पुतले के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए बांस, सूत की रस्सी, सन, मैदा और पानी के लेप (घोल), मोटे कागज और रंगीन कागजों का उपयोग किया जाता है. महीनों की कड़ी मेहनत के बाद कारीगरों की यह टीम इतने बड़े ढांचे को अंतिम रूप देती है.

आपसी सद्भाव का अनूठा संदेश

यह परंपरा न केवल एक कला का प्रदर्शन है, बल्कि यह देश के सामाजिक ताने-बाने और आपसी भाईचारे की एक मजबूत मिसाल भी पेश करती है. बिना किसी धार्मिक भेदभाव के, पारंपरिक कला और कारीगरी को सहेजने वाले ये कलाकार हर साल जयपुरवासियों के लिए उत्सव के उत्साह को और बढ़ा देते हैं. स्थानीय प्रशासन और लोग भी इन कलाकारों के समर्पण और कला की जमकर सराहना कर रहे हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 18, 2026 09:48 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).