देश की खबरें | भारत 2020-50 तक सीओपीडी के कारण आर्थिक बोझ झेलने वाला तीसरा देश हो सकता है: लांसेट

नयी दिल्ली, 25 जुलाई चीन तथा अमेरिका के बाद भारत 2020 से 2050 तक फेफड़ों में सूजन और वायु प्रवाह को बाधित करने वाले रोग ‘सीओपीडी’ के कारण सबसे अधिक आर्थिक बोझ झेलने वाला तीसरा देश हो सकता है। ‘द लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में यह कहा गया है।

पत्रिका में कहा गया है कि दुनियाभर में मौत की तीसरी प्रमुख वजह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज (सीओपीडी) के कारण 2019 में 33 लाख लोगों की मौत हुई। चीन में इस बीमारी से सबसे अधिक मौत हुई और उसके बाद भारत तथा अमेरिका में सीओपीडी से सबसे अधिक लोगों ने जान गंवायी।

अध्ययन के अनुसार, सीओपीडी के कारण 2009 से 2019 के बीच दुनियाभर में हुई मौतों में 14.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसकी वजह शहरीकरण, वायु प्रदूषण और तंबाकू का इस्तेमाल हो सकता है।

इसमें कहा गया कि इस बीमारी से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर 4.3 ट्रीलियन डॉलर का खर्च बढ़ सकता है जो 2019 में भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद का तकरीबन आधा है।

सीओपीडी से जुड़ी 90 फीसदी मौत कम आय और मध्यम आय वाले देशों में हुई जबकि इन देशों की आबादी वैश्विक आबादी का केवल 83 फीसदी हिस्सा है।

अध्ययन में कहा गया है कि अगर तंबाकू कंपनियां उभरते बाजार में अनियंत्रित रूप से बढ़ती रहीं, अधिक लोग शहरीकरण के कारण वायु प्रदूषण की जद में आते रहे और संक्रामक रोगों का फैलना जारी रहा तो इन मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

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