नयी दिल्ली, 15 जून भारत ने यूरोपीय संघ में इस साल अक्टूबर से लागू होनी जा रही कार्बन कर व्यवस्था से अपनी एमएसएमई इकाइयों को छूट देने की मांग की है क्योंकि इससे कुछ क्षेत्रों में घरेलू उद्योगों पर असर पड़ेगा।
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि यूरोपीय संघ में एक अक्टूबर से लागू होने जा रही कार्बन कर व्यवस्था (सीबीएएम) को लेकर वह यूरोपीय संघ के अधिकारियों के समक्ष अपनी चिंताएं जाहिर कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने ब्रसेल्स में आयोजित व्यापार एवं तकनीकी परिषद (टीटीसी) की बैठक के दौरान यूरोपीय संघ के अधिकारियों को इसके भारतीय उद्योग पर पड़ने वाले असर से अवगत कराया गया था। उन्होंने कहा, "हम उनसे जानना चाह रहे हैं कि क्या हमारे एमएसएमई क्षेत्र के लिए किसी तरह की छूट की संभावना है। इस बारे में चर्चा जारी है।"
बर्थवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने पर सहमति जताई है।
सीबीएएम लागू होने पर यूरोपीय संघ में चुनिंदा आयातों पर एक जनवरी, 2026 से 20-35 प्रतिशत तक शुल्क लगने की आशंका है। इसके तहत कार्बन-बहुलता वाले सात क्षेत्रों की घरेलू कंपनियों को सीबीएएम मानदंडों का पालन करने के लिए यूरोपीय संघ के अधिकारियों से अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।
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