नयी दिल्ली, 11 दिसंबर भारत कृत्रिम मेधा(एआई) पर मंगलवार से शुरू हो रहे वैश्विक साझेदारी (जीपीएआई) सम्मेलन में एआई अवसरों और जोखिम कम करने के दृष्टिकोण पर सर्वसम्मति-आधारित ‘घोषणा दस्तावेज’ के लिए प्रयास करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जीपीएआई राजधानी के भारत मंडपम में इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में इस नई प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां संवाददाताओं से कहा कि भारत इस सम्मेलन में टिकाऊ कृषि के लिए एआई के उपयोग के साथ इस प्रौद्योगिकी की ताकत का डीपीआई जैसी सहयोगी संरचना के विकास पर भी जोर देगा।
वैष्णव ने कहा कि जीपीएआई में विचार-विमर्श का नतीजा ‘आम सहमति’ के साथ एक घोषणा दस्तावेज के रूप में निकलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक घोषणापत्र पर बातचीत कर रहे हैं, हमें उम्मीद है कि हम कुछ आम सहमति पर पहुंचने में सक्षम होंगे।’’
वैष्णव ने कहा कि यह सम्मेलन एआई से संबंधित आम सोच को एक मंच पर लाने का अवसर देगा।
एआई की बारीकियों पर केंद्रित पहल जीपीएआई में 28 सदस्य देश और यूरोपीय संघ (ईयू) हैं। भारत 2024 के लिए जीपीएआई का अध्यक्ष है और इस क्रम में 12 से 14 दिसंबर तक वार्षिक जीपीएआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
इसमें स्टार्टअप, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों की भागीदारी होगी और जिम्मेदार एआई पर तकनीकी सत्र होंगे। यह एआई के लिए सामंजस्यपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने के लिए विचारों के अभिसरण की दिशा में काम करेगा।
इस आयोजन में हितधारक एआई के अवसरों और लाभ के दोहन पर विचार-मंथन करेंगे। इस दौरान एआई और वैश्विक स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल, एआई और डेटा प्रशासन, और मशीन लर्निंग कार्यशाला जैसे मुद्दों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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