जरुरी जानकारी | भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपने संकल्प दोहराने की जरूरत: नीति उपाध्यक्ष

नयी दिल्ली, पांच अगस्त नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के संदर्भ में अपने संकल्प को फिर से दोहराने की जरूरत है क्योंकि पर्यावरण संबंधी समस्याओं के कारण देश तापीय ऊर्जा को लेकर बहुत दूर तक नहीं जा सकता।

‘सौर ऊर्जा: बदलाव का एजेंट’ विषय पर अपने संबोधन में कुमार ने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी ज्यादा है और देश को वे ऐसी सभी प्रकार की ऊर्जा की जरूरत है जो वह पैदा कर सकता है। इसमें स्वच्छ और हरित ऊर्जा शामिल हैं।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘हमें नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर अपने संकल्प दोहराने की जरूरत है...कार्बन वास्तव में बजट बाधा है। हम जो भी करें, उसमें कार्बन उत्सर्जन को ध्यान में रखना है।’’

कुमार ने यह भी कहा कि भारत पर ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत के रूप में खुले खदानों से कोयला खनन को लेकर काफी दबाव होगा।

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि पर्यावरण नजरिये से हम ऐसे जगह पहुंच सकते हैं, जहां इस प्रकार की नीति के तहत तापीय उत्पादन को हम बहुत अधिक आगे तक नहीं बढ़ा सकेंगे।

कुमार ने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी अधिक है। देश का बड़ा हिस्सा अभी भी गुणवत्तापूर्ण बिजली से वंचित है।

उन्होंने कहा कि हमें सौर पैनल और सेल के विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

कुमार ने कहा, ‘‘हमें उन्हें वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उत्पादित करने की जरूरत है....।’’

उन्होंने कहा कि भारत में सौर बिजली क्षेत्र में तुलनात्मक लाभ है। ‘‘ऊर्जा के अन्य स्रोत के मुकाबलें नवीकरणीय ऊर्जा काफी प्रतिस्पर्धी है...यह कल के लिये ऊर्जा प्रदाता है।’’

कुमार ने कहा कि इतना ही नहीं भारत को दक्षिण एशिया की ऊर्जा जरूरतों का ध्यान रखना होगा।

कोयला ऊर्जा के बारे में उन्होंने कहा कि नई कोयला नीति के कारण र्सावजनिक क्षेत्र का कोयला उद्योग संक्रमण के दौर में है।

कुमार ने कहा, ‘‘लेकिन कोयला, ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति खो रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जल्दी ही हम ऐसे समय में पहुंचेंगे जब हमारी कोयला भंडार अवरूद्ध कोयला भंडार होगा। ’’

कुमार ने कहा कि भारत को कोयला खानों से गैस प्राप्त करने के नये रास्ते निकालने होंगे।

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