नयी दिल्ली, दो दिसंबर भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता पर जल्द फैसला लिए जाने में सहयोग के लिए समूह के सदस्यों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एनएसजी में भारत के प्रवेश के लिए अमेरिका ने खुल कर अपना समर्थन जाहिर किया है।
उन्होंने कहा ‘‘सरकार एनएसजी के सदस्यों के साथ लगातार बातचीत कर रही है। यह बातचीत समुचित स्तर पर हो रही है और इसका उद्देश्य भारत को समूह की सदस्यता के लिए शीर्घ निर्णय लेने में सहयोग की अपेक्षा है।’’
गौरतलब है कि 48 सदस्यीय एनएसजी उन देशों का समूह है जो परमाणु प्रौद्योगिकी और सामग्री के व्यापार से संबद्ध हैं और परमाणु हथियारों के अप्रसार में योगदान देते हैं।
चीन एनएसजी समूह में भारत की सदस्यता का इस आधार पर विरोध कर रहा है कि नयी दिल्ली ने अब तक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। चीन के विरोध के कारण एनएसजी समूह में भारत का प्रवेश मुश्किल बना हुआ है क्योंकि एनएसजी सहमति के सिद्धांत पर काम करता है।
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को आगे बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। भारत ‘‘सुधार के पश्चात सुरक्षा परिषद’’ में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी रखता है।
उन्होंने कहा ‘‘भारत संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं में सतत हिस्सा ले रहा है और एल.69 तथा जी-4 समूह में अपनी सदस्यता के माध्यम से अन्य सुधार उन्मुखी देशों के साथ काम कर रहा है। ’’
जी-4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान हैं वहीं एल.69 समूह में एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के विकासशील देश शामिल हैं।
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