देश की खबरें | भारत, ईयू ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर काम करने का फैसला किया

नयी दिल्ली, 28 फरवरी भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने शुक्रवार को एक प्रमुख सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर काम करने का फैसला किया और क्षेत्र में चीन की सैन्य ताकत के प्रदर्शन के बीच वैश्विक कानून और संप्रभुता के सम्मान के आधार पर स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के तरीकों को तलाशा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच बातचीत में भारत-यूरोपीय संघ के रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर प्रमुखता से चर्चा हुई।

वार्ता से पहले एक ‘थिंक टैंक’ को संबोधित करते हुए यूरोपीय आयोग की प्रमुख ने कहा कि प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से दोनों पक्षों को सीमा पार आतंकवाद और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों जैसे साझा खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा भारत के साथ हमारी नयी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं यह घोषणा कर सकती हूं कि हम जापान और दक्षिण कोरिया के साथ अपनी साझेदारी की तरह भारत के साथ भी भविष्य की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इससे हमें साझा खतरों का मुकाबला करने के लिए अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, चाहे वह सीमा पार आतंकवाद हो, समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा हो, साइबर हमले हों या हमारे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले हों।’’

वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘‘यह न केवल हमारे संबंधित क्षेत्रों में स्थिरता के बारे में है। बल्कि यह हमारी आर्थिक सुरक्षा और अंततः हमारी समृद्धि को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।’’

लेयेन के साथ बैठक के बाद मीडिया को दिए गए अपने बयान में मोदी ने सुरक्षा पर बढ़ते भारत-यूरोपीय संघ सहयोग को ‘‘पारस्परिक विश्वास’’ का प्रतीक बताया और कहा कि दोनों पक्ष साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अभियान के लिए सहयोग को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफ्रीका में सतत और समावेशी विकास के लिए त्रिकोणीय विकास परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगे।’’

नेताओं के एक संयुक्त बयान में कहा गया कि मोदी और वॉन डेर लेयेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता के लिए आपसी सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के आधार पर स्वतंत्र, मुक्त और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इसमें कहा गया कि दोनों पक्ष अफ्रीका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत त्रिपक्षीय सहयोग की संभावना तलाशने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

दोनों नेताओं ने भारतीय नौसेना और यूरोपीय संघ की समुद्री सुरक्षा संस्थाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और सहयोग समेत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया।

इसमें कहा गया कि नेताओं ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी की संभावनाएं तलाशने पर भी प्रतिबद्धता जताई।

बयान में कहा गया है, ‘‘उन्होंने व्यापार और समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटकर समुद्री सुरक्षा समेत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘उन्होंने आतंकवाद से निपटने में सहयोग को बढ़ाने तथा सीमापार आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।’’

दोनों नेताओं ने नयी योजनाओं और कार्यक्रमों से अवसर तलाशने के लिए रक्षा उद्योग और नीति पर भी चर्चा की।

मोदी और वॉन डेर लेयेन ने पश्चिम एशिया की स्थिति और यूक्रेन में युद्ध की स्थिति को लेकर भी विचार-विमर्श किया।

बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान के आधार पर यूक्रेन में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए समर्थन व्यक्त किया।’’

इसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने ‘‘द्वि-राष्ट्र समाधान’’ के दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें इजराइल और फलस्तीन अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ रह सके।

‘‘थिंक टैंक’’ में अपने संबोधन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही बहुत कुछ कर सकते हैं।

लेयेन ने कहा कि भारत अपनी सैन्य आपूर्ति में विविधता लाने और नयी क्षमताओं तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है और दोनों पक्ष ‘‘हमारे सुरक्षा उद्देश्यों’’ को पूरा करने के लिए एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, हम उन क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं जहां हमारे पास प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता है, जैसे साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और ड्रोन। यह केवल हमारे संबंधित क्षेत्रों में स्थिरता के बारे में नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह हमारी आर्थिक सुरक्षा और अंततः हमारी समृद्धि को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। और यही कारण है कि सुरक्षा भारत के साथ हमारी नयी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य हिस्सा होना चाहिए।’’

संबंधित घटनाक्रम में, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने यूरोपीय संघ के रक्षा एवं अंतरिक्ष आयुक्त एंड्रियस कुबिलियस के साथ वार्ता की।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर व्यापक चर्चा की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री संपर्क बढ़ाने व सूचना साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया।

मंत्रालय ने कहा कि सेठ और कुबिलियस ने रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के तरीकों और भारत में परियोजनाओं में यूरोपीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी पर विचार-विमर्श किया।

बयान में कहा गया है कि उन्होंने यूरोपीय संघ के स्थायी सहयोग और अन्य यूरोपीय विकास परियोजनाओं में भारतीय भागीदारी के तौर-तरीकों पर चर्चा की।

कुबिलियस भी वॉन डेर लेयेन नीत प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।

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