देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस समेत कई दलों ने कर्मचारियों को चेतावनी देने के लिए प्रशासन की आलोचना की

जम्मू, चार नवंबर कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सरकारी कर्मचारियों को विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की चेतावनी देने के लिए शनिवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन की आलोचना की।

इन राजनीतिक दलों ने प्रशासन के इस कदम को केंद्र शासित प्रदेश में 'असहमति की हर आवाज को कुचलने' की कोशिश करार दिया।

उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने शुक्रवार को सरकारी कर्मचारियों को उनके प्रस्तावित आंदोलन को आगे बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के कृत्यों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जम्मू-कश्मीर सरकार कर्मचारी (आचरण) नियम, 1971 यह स्पष्ट करता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी सेवा या किसी अन्य सरकारी कर्मचारी की सेवा से संबंधित किसी भी मामले के सिलसिले में किसी भी तरह से हड़ताल का सहारा नहीं लेगा या किसी भी तरह से उकसाएगा नहीं।

प्रशासन ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ कानून का उपरोक्त प्रावधान केवल घोषणात्मक प्रकृति का नहीं है और ऐसे किसी भी कर्मचारी के ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाने की स्थिति में निश्चित रूप से इसके परिणाम होंगे। ’’

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी रवींदर शर्मा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘ केंद्र सरकार के अधीन प्रशासन असहमति की हर आवाज को कुचलना चाहता है, जो बेहद खतरनाक, कर्मचारी विरोधी और जनविरोधी है। ’’

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके वास्तविक मुद्दों को लेकर प्रशासन की विफलता के खिलाफ विरोध करने का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने कहा,‘‘ कांग्रेस सरकारी कर्मचारियों सहित प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा और समर्थन करती है और इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करती है। ’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शेख बशीर अहमद ने कहा कि आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि जम्मू-कश्मीर में किसी को भी बोलने की इजाजत नहीं है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एम वाई तारिगामी ने कहा कि यह आदेश अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के सम्मेलनों का उल्लंघन है, जिसमें भारत एक सदस्य है।

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