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जरुरी जानकारी | सोयाबीन, बिनौला तेल में सुधार: डीओसी मांग कमजोर होने से सोयाबीन तिलहन में गिरावट

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जरुरी जानकारी | सोयाबीन, बिनौला तेल में सुधार: डीओसी मांग कमजोर होने से सोयाबीन तिलहन में गिरावट

नयी दिल्ली, 13 जनवरी खाद्यतेलों, खासकर सोयाबीन और सूरजमुखी तेल जैसे सॉफ्ट (नरम) खाद्यतेलों के कम आयात और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव की वजह से आपूर्ति प्रभावित होने से देश के तेल-तिलहन बाजारों में शनिवार को सोयाबीन तेल के साथ बिनौला तेल कीमतों में सुधार देखने को मिला।

दूसरी तरफ विदेशों में डी-आयल्ड केक (डीओसी) की मांग कमजोर रहने से सोयाबीन तिलहन में गिरावट रही। सामान्य कारोबार के बीच सरसों, मूंगफली तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल कीमतें पूर्व-स्तर पर बंद हुई।

बाजार सूत्रों ने कहा कि खपत बढ़ने पर पिछले साल की तरह खाद्यतेलों का आयात भी बढ़ना चाहिए था। नवंबर-दिसंबर, 2022 के दौरान 31,11,669 टन (खाद्य एवं अखाद्य) तेलों का आयात हुआ था जो नवंबर-दिसंबर, 2023 में 21 प्रतिशत घटकर 24,72,276 टन रह गया। पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति की वजह से आपूर्ति प्रभावित होने की भी आशंका है और देश के बंदरगाहों पर सोयाबीन तेल आने में 40-45 दिन लगते हैं।

ऐसी परिस्थिति में विदेशों में खाद्यतेलों के दाम मंदा होने के बावजूद देश के बाजारों पर कोई असर नहीं पड़ा। यह दर्शाता है कि आयात कम होने की वजह से देश में खाद्यतेलों का स्टॉक कम है। सूरजमुखी, सोयाबीन जैसे खाद्यतेलों की आपूर्ति कम है। आगे जाड़े के साथ शादी-विवाह के मौसम की मांग भी बढ़ने वाली है। ऐसे में खाद्यतेलों की आपूर्ति की दिक्कत बढ़ सकती है। इस तरफ ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यह स्थिति देशी तेल तिलहन का उत्पादन बढ़ाने की भी जरुरत को रेखांकित करता है।

देश की एक प्रमुख तेल कंपनी पामोलीन तेल के 770 ग्राम का पाउच (थैली) 85 रुपये के अधिकतम खुदरा मूल्य पर बेच रही है। इसके हिसाब से पामोलीन तेल का भाव 120 रुपये प्रति किलो बैठता है। जबकि पामोलीन का आयात भाव 85 रुपये प्रति किलो ही है। पामोलीन तेल गरीब लोग ज्यादा उपयोग करते हैं और वे इस बढ़ी लागत का बोझ उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि तेल संगठनों को इस पहलू पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ सरकार को भी सिर्फ थोक दाम कम होने पर ध्यान देने के बजाय खुदरा बिक्री मूल्य की भी सुध लेनी होगी।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,415-5,465 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,665-6,740 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,750 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,350-2,625 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,025 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,710 -1,805 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,710 -1,810 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,075 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,825 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,325 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,900 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,525 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,005-5,035 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,815-4,855 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 13, 2024 08:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).