नयी दिल्ली, 11 मई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सर्वसम्मति से फैसला दिया कि लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि जैसे विषयों को छोड़कर अन्य सेवाओं पर दिल्ली सरकार के पास विधायी तथा प्रशासकीय नियंत्रण है।
फैसले के महत्वपूर्ण बिंदु
- सरकार के लोकतांत्रिक स्वरूप में प्रशासन की वास्तविक शक्ति संविधान की सीमाओं के अधीन राज्य की निर्वाचित शाखा में होनी चाहिए।
- यदि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अपने कार्यक्षेत्र में तैनात अधिकारियों को नियंत्रित करने की शक्ति प्रदान नहीं की जाती है, तो सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत बेमानी हो जाएगा।
- आईएएस, या संयुक्त कैडर सेवाओं जैसी सेवाओं पर विधायी और कार्यकारी शक्ति, जो नीतियों के कार्यान्वयन के लिए प्रासंगिक हैं, दिल्ली सरकार के पास होगी।
- केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीटीडी) सरकार विशिष्ट संघीय संबंध साझा करती हैं और उन्हें एक दूसरे के साथ सहयोग करने की आवश्यकता है।
- लोकतंत्र और संघवाद के सिद्धांत हमारे संविधान की आवश्यक विशेषताएं हैं और बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा हैं।
- उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी के विधायी दायरे के भीतर मामलों के संबंध में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बंधे हैं।
- सहकारी संघवाद की भावना में, केंद्र को संविधान द्वारा बनाई गई सीमाओं के भीतर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
-संघ और एनसीटीडी एक अद्वितीय संघीय संबंध साझा करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य ना होने के कारण एनसीटीडी को संघ की इकाई में शामिल किया गया है।
- लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के पास अपने प्रशासन का नियंत्रण होना चाहिए।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के समान नहीं है और इसे संविधान द्वारा एक विशिष्ट दर्जा दिया गया है।
- एक गैर-जवाबदेह और गैर-जिम्मेदार सिविल सेवा लोकतंत्र में शासन की गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY