देश की खबरें | दिल्ली में वायु प्रदूषण पर महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किया गया

नयी दिल्ली, 15 मई दिल्ली सरकार ने कहा कि शहर में वायु प्रदूषण के स्रोतों की वास्तविक समय में पहचान करने के लिए हुए एक अध्ययन के नतीजों और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की रणनीति बनाने के लिए सोमवार को एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।

‘‘पर्यावरण बचाओ गोलमेज सम्मेलन’’ नामक सम्मेलन सोमवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित किया गया और इसमें वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सफर, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, भारत मौसम विज्ञान विभाग, विश्व बैंक, विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र, ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी) और एनसीआर से लगे राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, ‘‘हमने स्रोतों पर अध्ययन की रिपोर्ट साझेदारों के साथ साझा की, उनकी राय ली और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए एक रणनीति तैयार की।’’

उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य दिल्ली में वायु गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर नीतियां तैयार करना है।

वास्तविक समय में स्रोतों की पहचान (आरटीएसए) अध्ययन किसी भी स्थान पर वायु प्रदूषण में वृद्धि के लिए जिम्मेदार कारकों की पहचान करने में मदद करता है, जैसे कि वाहन, धूल, जैविक सामग्री जलाना और उद्योगों से उत्सर्जन, ताकि तदनुसार निवारक उपाय किए जा सकें।

राय ने कहा कि वास्तविक समय में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के योगदान का पता लगाने के लिए दिल्ली में 13 वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट में मोबाइल वायु गुणवत्ता निगरानी वैन स्थापित करने के आदेश जारी किए गए हैं।

पर्यावरण मंत्री ने कहा, ‘‘ आरटीएसए अध्ययन के लिए धन्यवाद, अब वायु गुणवत्ता का आकलन और विश्लेषण दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और मौसमी आधार पर किया जा सकता है, जिसकी मदद से सरकार प्रदूषण के स्तर में अचानक हुई वृद्धि को तुरंत कम करने के लिए कदम उठा सकती है। इसकी मदद से (अति सूक्ष्म कण)पीएम-2.5, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, कॉर्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, ओजोन, द्वितीयक अकार्बनिक और जैविक एरोसोल जैसे प्रदूषकों की निगरानी अधिक सुव्यवस्थित और सटीक हो गई है। ’’

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए कार्य योजना के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में आरटीएसए अध्ययन शुरू किया था। यह उपलब्धि हासिल करने वाली दिल्ली देश में पहला प्रदेश है।

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