देश की खबरें | डॉक्टररेट की डिग्री देने से इंकार के बाद संशोधित थीसिस बाहरी परीक्षक को भेजेगा आईआईटी-खड़गपुर

नयी दिल्ली, पांच जुलाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)- खड़गपुर के अधिकारियों ने उस छात्र की संशोधित थीसिस किसी बाहरी परीक्षक को भेजने का निर्णय किया है जिसे संस्थान द्वारा कई बार डॉक्टरेट की डिग्री देने से इनकार किया गया है। इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।

मामला महेश शिरोले से संबंधित है जो स्वयं को पीएचडी से इनकार किये जाने के खिलाफ अपने सुपरवाइजर प्रोफेसर राजीव कुमार के साथ विभिन्न प्राधिकारियों से सम्पर्क कर चुके हैं।

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कुमार अपने छात्र के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और भारत के राष्ट्रपति से की गई अपनी अपील में दावा किया कि उनके छात्र को पीएचडी से इनकार किया जाना संस्थान का उनके प्रति ‘‘प्रतिशोधी रवैये’’ का परिणाम है।

कुमार एक लंबी विधिक लड़ाई के बाद जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में काम कर रहे हैं।

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आईआईटी-खड़गपुर की सीनेट की 27 मई को हुई बैठक के विवरण के अनुसार, ‘‘मामले के गुणदोष के मद्देनजर संशोधित थीसिस को परीक्षण के लिए पूरी पृष्ठभूमि के साथ भारत के भीतर किसी नये बाहरी परीक्षक के पास भेजा जाएगा।’’

सीनेट के निर्देश वाला एक आदेश 24 जून को संस्थान के कम्प्युटर विज्ञान और इंजीनियर विभाग के प्रमुख को भेजा गया है।

संस्थान के आदेश ने कहा गया है, ‘‘डीएससी (डॉक्टरेट जांच पड़ताल समिति) के साथ परामर्श से विभाग के प्रमुख एक पैनल का गठन करने के लिए पांच नए नाम भेजेंगे और चेयरमैन सीनेट परीक्षकों के एक पैनल को मंजूरी देने के लिए अधिकृत हैं और तदनुसार संशोधित थीसिस को पृष्ठभूमि के साथ अनुमोदित पैनल में से एक परीक्षक के पास मूल्यांकन के लिए भेजा जाएगा।’’

कुमार ने बताया कि शिरोले ने पीएचडी के लिए अपनी थीसिस 2014 में जमा की थी, जिसे एक भारतीय परीक्षक द्वारा स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन एक प्रवासी परीक्षक द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मूल थीसिस को किसी तीसरे परीक्षक को भेजा जाना चाहिए था। हालांकि इसके बजाय, आईआईटी छात्र को थीसिस को संशोधित करने और दो बार उसी एनआरआई परीक्षक को भेजने के लिए कहता रहा जिसने थीसिस को हर बार नई टिप्पणियों के साथ अस्वीकार किया।’’

पिछले कुछ वर्षों से, शिरोले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपील भेज रहे हैं। राष्ट्रपति आईआईटी के विजिटर भी हैं।

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