नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अदालतों के सीमित कामकाज की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहे वकीलों की पहचान करना जरूरी है और बार एसोसिशनों को संकट की इस घड़ी में उनकी अधिक मदद करनी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा, ‘‘इस संकट में आप लोग अपनी जेबों में हाथ क्यों नहीं डाल रहे और आपकी बार के सदस्यों की मदद क्यों नहीं कर रहे।’’
विभिन्न बार संस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं से पीठ ने कहा कि अधिवक्ता एसोसिएशन की प्राइमरी जिम्मेदारी जरूरतमंद वकीलों की मदद करना है क्योंकि केन्द्र को संकट की इस घड़ी में तमाम लोगों पर धन खर्च करना है।
पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या धन का बड़ा हिस्सा बार एसोसिएशनों से नहेीं आना चाहिए। प्राइमरी जिम्मेदारी बार एसोसिएशनों की है। भारत सरकार को संकट की इस घड़ी में तमाम लोगों पर धन खर्च करना है।’’
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पीठ ने कहा, ‘‘यहां महत्वपूर्ण यह है कि उन अधिवक्ताओं की पहचान की जाये जिन्हें जरूरत है और जो मदद के हकदार हैं। आपको सावधान रहना होगा। महामारी वरदान नहीं बन सकती।’’
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही केन्द्र से भी वकीलों के लिये आकस्मिक निधि स्थापित करने के बारे में जानकारी मांगी।
विभिन्न बार संस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता ने कहा कि वे महामारी के दौरान पिछले छह महीने से जरूरतमंद अधिवक्ताओं की यथासंभव मदद कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि महामारी की वजह से अदालतों में कामकाज सीमित होने के कारण वकीलों की वित्तीय समस्याओं से संबंधित मसले पर दो सप्ताह बाद सुनवाई की जायेगी।
शीर्ष अदालत ने महामारी की वजह से वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहे वकीलों के मामले को इस साल जुलाई मे गंभीरता से लेते हुये वकीलों को राहत प्रदान करने के लिये आकस्मिक निधि स्थापित करने के बारे में केन्द्र और सभी बार संस्थाओं से जवा मांगा था।
अधिवक्ताओं की सर्वोच्च संस्था बार काउन्सिल आफ इंडिया ने भी न्यायालय से वकीलों के लिये कम ब्याज पर कर्ज सहित वित्तीय सहायता का अनुरोध किया था ताकि महामारी के इस दौर , जब न्यायिक कामकाज ठप है, में जरूरतमंद वकीलों की मदद की जा सके।
शीर्ष अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में इसी मुद्दे को लेकर दायर याचिकाओं को अपने यहां मंगाने के बारे में बार काउन्सिल आफ इंडिया के आवेदन पर नोटिस जारी किये थे।
देश में कोविड-19 महामारी की वजह से लॉकडाउन होने के कारण मार्च के अंतिम सप्ताह से ही देश की अदालतें सिर्फ महत्वपूर्ण मामलों की ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई कर रही हैं। इस वजह से बड़ी संख्या में आम अधिवक्ताओं के सामने तरह तरह की परेशानियां खड़ी हो गयी हैं।
अनूप
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