विदेश की खबरें | नाइजर में सैकड़ों लोगों ने रैली निकाली, फ्रांस की निंदा की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

नाइजर के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तख्तापलट करने वाली सैन्य सरकार और नागरिक समूहों द्वारा आहूत रैली के दौरान जुटी भीड़ ने उन पड़ोसी देशों के प्रति भी अपना समर्थन जताया, जहां तख्तापलट हुआ है।

प्रदर्शनस्थल पर कुछ लोगों ने रूस का झंडा लहराया जबकि एक व्यक्ति रूस और नाइजर का एक साथ सिला हुआ झंडा लेकर पहुंचा।

देश की सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को करीब एक सप्ताह पहले अपदस्थ कर दिया था। सेना और नागरिक समाज समूहों ने तीन अगस्त को रैली निकालने का आह्वान किया था। यह वही तारीख है जब 1960 में नाइजर की अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस से आजादी की घोषणा की गई थी।

तख्तापलट की पश्चिमी देशों और ‘ईसीओडब्ल्यूएस’ नामक पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्रीय समूह ने कड़ी निंदा की है, जिसने बजौम को सत्ता वापस नहीं सौंपने पर सैन्य सरकार को हटाने के लिए बल प्रयोग करने की चेतावनी दी है।

बृहस्पतिवार के विरोध-प्रदर्शन में, कई लोगों ने तख्तापलट करने वाले नेताओं के प्रति समर्थन व्यक्त किया और दूसरों के हस्तक्षेप की निंदा की।

प्रदर्शनकारी एम. अब्दुइस्सा ने कहा, ‘‘13 साल से अधिक समय से नाइजीरियाई लोगों ने अन्याय सहा है। जुंटा (सैन्य सरकार) हमें इससे बाहर निकालेगा। हम फ्रांसीसियों से तंग आ चुके हैं।’’

देश के नए सैन्य शासक जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी ने पड़ोसी देशों को उनके देश में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी और देशवासियों से राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार रहने की अपील की।

त्चियानी ने बुधवार रात को टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में अन्य देशों को हस्तक्षेप नहीं करने और तख्तापलट के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी।

त्चियानी ने कहा कि नाइजर को भविष्य में मुश्किल समय का सामना करना होगा और उनके शासन का विरोध करने वालों के ‘‘शत्रुतापूर्ण एवं कट्टर’’ रवैये से देश को कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने पिछले सप्ताह पश्चिम अफ्रीकी देशों के आर्थिक समूह (ईसीओडब्ल्यूएस) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को अवैध, अनुचित, अमानवीय एवं अप्रत्याशित करार दिया।

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