मुंबई, 19 अक्टूबर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बुधवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन को हराने तथा वैश्विक तापमान को नियंत्रण में रखने के लिए विकसित और विकासशील देशों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते की आवश्यकता है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बंबई में एक कार्यक्रम में गुतारेस ने कहा कि 80 फीसदी वैश्विक उत्सर्जन के लिए जी20 देश जिम्मेदार हैं और उन्हें ग्रीनहाउस गैसों की कटौती में सबसे आगे होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐतिहासिक समझौते की आवश्यकता है जिसमें विकसित देश वित्तीय और तकनीकी संसाधनों के साथ जलवायु परिवर्तन को हराने तथा तापमान को नियंत्रण में रखने के लिए उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को अतिरिक्त आवश्यकताओं के साथ संयुक्त प्रयास करने के लिए कड़ा समर्थन करें।’’
गुतारेस ने उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से उत्सर्जन कम करने के अंतर को खत्म करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि लेकिन ये देश विकसित देशों के वित्तीय और तकनीकी समर्थन के साथ ही ऐसा कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, ‘‘अगर विकसित देशों और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच कोई ऐतिहासिक समझौता नहीं होता है तो जलवायु परिवर्तन हमें हमेशा के लिए पराजित कर देगा।’’
उन्होंने कहा कि जलवायु संकट सामूहिक विकास की आकांक्षाओं का सबसे बड़ा अवरोधक हो सकता है और भारत कोई अपवाद नहीं है।
गुतारेस ने कहा कि यह पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र और करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य, जीवन और आजीविका के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्म हवाएं, सूखा और बाढ़ पहले ही तबाही मचा रही हैं। यह इस बात का पूर्वाभास है कि वैश्विक स्तर पर जलवायु संबंधी बड़ा कदम उठाए बिना क्या हो सकता है।’’
इसके साथ ही उन्होंने अहम नवीनीकरण प्रौद्योगिकियों जैसे कि बैटरी स्टोरेज को वैश्विक रूप से सार्वजनिक उपयोग के संसाधन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुतारेस ने कहा कि दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा तथा सबसे बड़ी युवा आबादी होने के कारण भारत 2030 के एजेंडे और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल कर सकता है।
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