देश की खबरें | अवैध निर्माण से हिमालयी क्षेत्र दबाव में, जोशीमठ जैसी घटनाएं रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं: समिति

नयी दिल्ली, 10 अगस्त संसद की एक समिति ने बृहस्पतिवार को कहा कि पर्यटन में जबरदस्त वृद्धि और होटलों एवं रस्तरां के अवैध निर्माण से हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है तथा सरकार को जोशीमठ जैसी आपदाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन पर संसद की स्थायी समिति ने राज्यसभा में पेश अपनी 135वीं रिपोर्ट में स्थानीय अधिकारियों के समन्वय से पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अवैध ढांचों की गहन जांच करने और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत पर भी जोर दिया ताकि 2013 में केदारनाथ और इस साल की शुरुआत में हुई जोशीमठ जैसी त्रासदियों को रोका जा सके।

समिति ने इन क्षेत्रों में पर्यटक गतिविधियों में जबरदस्त वृद्धि पर भी प्रकाश डाला, जिसने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाला है। समिति ने कहा कि इससे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ है और होम स्टे, गेस्ट हाउस, रेस्तरां तथा होटल का अवैध निर्माण तथा अन्य अतिक्रमण हुआ है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय को पारिस्थितिक रूप से विनाशकारी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए स्पष्ट समय सीमा के साथ एक व्यावहारिक और कार्यान्वयन योग्य कार्य योजना तैयार करनी चाहिए।

समिति ने मंत्रालय से क्षेत्र में किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण आपदा की स्थिति में पालन की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने और हिमालय में भौतिक बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में ‘बेलगाम’ वृद्धि की निगरानी तथा जांच के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराने के लिए भी कहा।

उत्तराखंड में अधिकारियों ने जनवरी में चमोली जिले के जोशीमठ को भूस्खलन और धंसने से प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया था क्योंकि शहर में आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों और सड़कों और खेतों में व्यापक दरारें दिखाई दी थीं। कई इमारतों को असुरक्षित घोषित कर दिया गया और निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि हिमालयी शहर दो जनवरी को संभावित धंसाव की घटना के बाद महज 12 दिनों में 5.4 सेंटीमीटर धंस गया।

हालांकि जोशीमठ भूस्खलन की संभावना वाले क्षेत्र में एक नाजुक पहाड़ी ढलान पर स्थित है, लेकिन इसके धंसने के लिए वहां बड़े पैमाने पर की जा रही विकास परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराया गया है।

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