नयी दिल्ली, 12 दिसंबर बिहार के रोहतास जिले में एक वैवाहिक समारोह में आठ लोगों की हत्या के 37 साल पुराने मामले में उच्चतम न्यायालय ने दोषसिद्धि के खिलाफ चार लोगों की अपील खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने हालांकि इन चारों की ओर से पेश वकील अखिलेश कुमार पांडेय के उस अनुरोध पर संज्ञान लिया कि समयपूर्व रिहाई के उनके आवेदन पर राज्य प्रशासन द्वारा निश्चित समय सीमा के अंदर विचार किया जाए।
पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा, ‘‘इस अवसर पर अपीलकर्ताओं की ओर से पेश सुविज्ञ वकील ने बताया कि वे 14 सालों से अधिक समय से सलाखों के पीछे हैं, ऐसे में समयपूर्व रिहाई के लिए संबंधित नीति के तहत उनके मामले पर विचार करना होगा। हमें इस दलील में दम नजर आता है। ऐसी स्थिति में हम प्रतिवादी संख्या एक (बिहार सरकार) को इस आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के अंदर समयपूर्व रिहाई के लिए अपीलकर्ताओं के मामले पर विचार करने का निर्देश देते हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियुक्तों से आशा की जाती है कि इस संबंध में वे दो सप्ताह के अंदर उपयुक्त आवेदन देकर सहयोग करें।
पीठ ने कहा, ‘‘ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संबंधित सदस्य सचिव को इस प्रक्रिया को पूरा करने में अपीलकर्ताओं के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया जाता है।’’
शीर्ष अदालत इबरार अंसारी, रसूल अंसारी, मोजफ्फर मियां और अनीश अंसारी की अपील पर सुनवाई कर रही थी। चारों ने इस मामले में उन्हें दोषी ठहराने और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार डकैतों के एक समूह ने आठ जून, 1987 को रोहतास जिले के इटावा गांव में वैवाहिक समारोह पर हमला कर दिया था और आठ लोगों की हत्या कर दी थी। अभियोजन के अनुसान ये चारों उस हमले में शामिल थे।
अपीलकर्ताओं का कहना था कि इस मामले में उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था। निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने उनके दावे को खारिज कर दिया था।
रोहतास की निचली अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इन चारों अभियुक्तों समेत सभी 13 आरोपियों को दोषी ठहराया था। बाद में ये चारों उच्चतम न्यायालय चले गये थे।
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