देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने आंबेडकर की रचनाओं के प्रकाशन के बारे में महाराष्ट्र सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी

मुंबई, 12 जनवरी बंबई उच्च न्यायालय ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की रचनाओं एवं भाषणों के संग्रह को प्रकाशित करने की एक परियोजना के बारे में महाराष्ट्र सरकार को बुधवार को एक स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति पी.बी. वराले और न्यायमूर्ति ए.एस. किलोर ने सरकार को इस मामले में नोटिस जारी किया और उसे तीन सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2021 में समाचार पत्रों में आई इन खबरों पर स्वत:संज्ञान लिया था कि यह परियोजना रूक गई है।

उच्च न्यायालय ने परियोजना को बहुत आवश्यक एवं वांछनीय करार देते हुए अदालत की रजिस्ट्री को विषय को जनहित याचिका में तब्दील करने का निर्देश दिया था।

जनहित याचिका पर दलील देने के लिए नियुक्त अधिवक्ता स्वराज जाधव ने बुधवार को कहा कि सरकार ने 1979 में बाबासाहेब आंबेडकर स्रोत सामग्री प्रकाशन समिति गठित की थी लेकिन ज्यादा काम नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने भारत के बाहर भी कई महत्वपूर्ण भाषण दिये थे जिनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित हुए थे। उन्होंने कहा कि इन भाषणों और खबरों को परियोजना में शामिल किया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘जब सरकार ने आंबेडकर के भाषणों और रचनाओं को प्रकाशित करने का फैसला कर लिया है तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित सामग्री पर कोई रोक नहीं है। कुछ साक्षात्कार भी हैं। इसलिए समिति हर चीज पर विचार कर सकती है। हमें नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित सामग्री को शामिल करने के लिए कोई विशेष निर्देश की जरूरत है। हम राज्य से एक उपयुक्त जवाब दाखिल करने और हमें यह बताने को कहेंगे कि समिति और पूरी परियोजना की क्या स्थिति है।

अदालत ने इस बात का जिक्र किया कि समिति के अध्यक्ष का कुछ महीने पहले निधन हो गया, इसलिए सरकार को नयी नियुक्ति करनी होगी या पूरी समिति का पुनर्गठन करना होगा।

मराठी दैनिक लोकसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक, परियोजना के तहत आंबेडकर की रचनाओं की 33,000 प्रतियां प्रकाशित की गई और सिर्फ 3,675 प्रतियां वितरण के लिए उपलब्ध कराई गई।

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