देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने किराया माफ करने की अर्जी खारिज की, याचिकाकर्ता पर 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया
जियो

नयी दिल्ली, 17 जून दिल्ली उच्च ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान किरायेदारों द्वारा देय किराये को माफ करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका को यह कहते हए खारिज कर दिया है कि यह मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच के अनुबंध शर्तों में धीरे से दखल देना होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालत किराये की माफी की मंजूरी नहीं दे सकती है क्योंकि किराये का भुगतान किरायेदार और मकान मालिक के बीच अनुबंध पर आधारित होता है और यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि मकान मालिक भी किराये पर आश्रित हो सकते हैं।

यह भी पढ़े | उरी और पुलवामा पर हुई सर्वदलीय बैठक से इस बार की मीटिंग क्यों अहम है?.

याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता-वकील पर ‘न्यायिक समय बर्बाद’ करने को लेकर 10,000 रूपये का जुर्माना लगाया और कहा कि यह अर्जी ‘गलत धारणा पर आधारित है और इसका कोई आधार नहीं है।’

अदालत ने कहा कि यह याचिका जनहित याचिका नहीं बल्कि प्रचार पाने के लिये दायर याचिका है।

यह भी पढ़े | लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय जवानों पर हमला पूर्व नियोजित, दुस्साहस के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को दिया कड़ा संदेश.

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने 15 जून को यह आदेश सुनाया, जो बुधवार को उपलब्ध हुआ। पीठ ने कहा कि उसकी इस मामले पर विचार करने में रुचि नहीं है, क्योंकि उसे यह कानून की प्रक्रिया का दुरूपयोग लगता है।

याचिकाकर्ता गौरव जैन ने लॉकडाउन के दौरान किरायेदारों द्वारा दिये जाने वाले किराये को माफ करने की मांग की थी और यह भी कहा था कि किराये नहीं देने को लेकर किसी किरायेदार से मकान खाली नहीं कराया जाए।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)