उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान टोल वसूलने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज की
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चेन्नई, 27 अप्रैल मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को वह जनहित याचिका खारिज कर दी जिसमें कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन हटने तक टोल शुल्क माफ करने का अनुरोध किया गया था।

अदालत ने अपने पिछले आदेश को रेखांकित किया जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को रोड की देखभाल और वाहनों की निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही के लिए टोल वसूली के लिये जिम्मेदार ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि टोल वसूलने के खिलाफ व्यापक आदेश नहीं दिया जा सकता।

न्ययामूर्ति एम सत्यनारायणन और न्यायमूर्ति एम निर्मल कुमार ने हालांकि, जनहित याचिका दायर करने वाले वी मुनिकृष्णांतो को यह आजादी दी कि अगर कानून में अनुमति हो तो एनएचएआई के पास राहत के लिए विस्तृत आवदेन दायर कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि लॉकडाउन की वजह से किसानों और अन्य को भारी नुकसान हो रहा है और ऐसे में टोल वसूलना जख्म पर नमक छिड़कने जैसा होगा।

इससे पहले सहायक सॉलिसिटर जनरल जी कार्तिकेयन ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों और संग्रह का निर्धारण) नियम-2008 के तहत टोल वसूलने का कानूनी अधिकार है।

इस बीच, एक अन्य जनहित याचिका में लॉकडाउन के दौरान घरेलू इस्तेमाल के उपकरणों की दुकानों को लॉकडाउन के दौरान खोलने की अनुमति देने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जिसपर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है।

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