मुंबई, 12 जुलाई पश्चिम रेलवे की सात उपनगरीय रेलगाड़ियों में अलग-अलग स्थानों पर हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के अठारह साल बाद बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दोषियों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई और मौत की सजा की पुष्टि के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया।
ग्यारह जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की सात उपनगरीय रेलगाड़ियों में हुए सात विस्फोटों में 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की विशेष खंडपीठ 15 जुलाई से मामले की सुनवाई करेगी।
यह कदम मौत की सजा पाए दोषियों में से एक एहतेशाम सिद्दीकी द्वारा अपने वकील युग चौधरी के माध्यम से एक आवेदन दायर किए जाने के तुरंत बाद आया। आवेदन में मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया है।
चौधरी ने इस महीने की शुरुआत में न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ को बताया था कि मामले के आरोपी पिछले 18 वर्षों से सलाखों के पीछे हैं और उनकी अपील पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि अपील कई पीठों के समक्ष बार-बार सूचीबद्ध की गई हैं लेकिन अभी तक सुनवाई के लिए नहीं ली गई हैं।
पीठ ने तब कहा था कि 18 साल वास्तव में बहुत लंबा समय है और अपील पर सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
चौधरी और विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे ने पीठ को सूचित किया था कि अपील पर सुनवाई में कम से कम छह महीने लगेंगे।
सितंबर 2015 में निचली अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से पांच को मृत्युदंड और शेष सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। निचली अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली मौत की सजा की पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
दोषियों ने भी अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए अपील दायर की थीं। तब से अपील 11 अलग-अलग पीठों के समक्ष आ चुकी हैं लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।
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