देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने स्थानीय निकाय चुनावों पर राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना दरकिनार की

अमरावती, 21 मई आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंडल और जिला परिषदों के चुनाव कराने संबंधी राज्य निर्वाचन आयोग की एक अप्रैल की अधिसूचना दरकिनार कर दी।

अदालत ने अधिसूचना को दरकिनार करते हुए कहा कि यह अवैध, मनमानी और उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन है।

उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग को नयी अधिसूचना जारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया वहीं से शुरू हो जहां यह मार्च 2020 में रुकी थी।

अदालत ने हालांकि जनसेना के इस आग्रह को मानने से इनकार कर दिया कि चुनाव प्रक्रिया नए सिरे से नामांकन के चरण से शुरू की जाए।

न्यायमूर्ति अरूप कुमार गोस्वामी और न्यायमूर्ति सी प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने मंडल और जिला परिषद चुनावों की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी थी जो कार्यक्रम के अनुसार इस साल आठ अप्रैल को पूर्ण हो गई, लेकिन मतगणना अदालत के आदेश के अनुरूप अभी होनी बाकी है।

खंडपीठ ने परिषद चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने के न्यायमूर्ति यू दुर्गा प्रसाद की एकल पीठ के छह अप्रैल के आदेश पर रोक लगा दी थी।

मामले में बाद में, न्यायमूर्ति एम सत्यनारायण मूर्ति ने जनसेना पार्टी और तेदेपा नेता वरला रमैया की रिट याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें राज्य निर्वाचन आयोग की एक अप्रैल की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी और कहा गया था कि यह उच्चतम न्यायालय के 18 मार्च 2020 के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग से मतदान की अधिसूचित तारीख से चार सप्ताह पहले आदर्श आचार संहिता लागू करने को कहा गया था।

मुख्य याचिकाकर्ता जनसेना ने आग्रह किया था कि पिछले साल चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के चलते मार्च 2020 की अधिसूचना को रद्द कर नयी अधिसूचना जारी की जाए।

न्यायमूर्ति सत्यनारायण मूर्ति ने आज दिए अपने फैसले में राज्य निर्वाचन आयुक्त नीलम साहनी को जमकर झाड़ लगाई और कहा कि उन्होंने अधिसूचना अपने कार्यभार संभालने के दिन (एक अप्रैल) को जारी की और ऐसा करते समय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अभिप्राय को उन्होंने देखा तक नहीं।

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