मुंबई, 20 सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें बैंक ऋण चूक से जुड़े धनशोधन मामले में उनकी ‘‘अवैध’’ गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।
गोयल ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी है क्योंकि इसके लिए धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में एक विशेष अदालत के आदेशों को भी चुनौती दी गई, जिसने उन्हें पहले ईडी की हिरासत में भेजा था और उसके बाद जेल भेज दिया गया।
बुधवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी की ओर से पेश वकील हितेन वेनेगांवकर ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।
गोयल (74) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने अपने मुवक्किल की बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए अदालत से सुनवाई के लिए नजदीकी तारीख देने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ ने कहा कि उसे दूसरे पक्ष को जवाब देने के लिए समय देना होगा।
न्यायमूर्ति डेरे ने कहा, ‘‘वह (गोयल) जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं। ईडी इस याचिका (गोयल द्वारा उच्च न्यायालय में दायर) की पोषणीयता को चुनौती दे सकती है।’’
पीठ ने मामले की सुनवाई छह अक्टूबर के लिए तय की। ईडी को इस तारीख तक अपना हलफनामा दाखिल करना होगा।
गोयल केनरा बैंक के साथ 538 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तारी के बाद मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।
कभी भारत की शीर्ष निजी एयरलाइन का संचालन करने वाले व्यवसायी गोयल को ईडी ने एक सितंबर को गिरफ्तार किया था और उन्हें एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया था, जिसने उन्हें 14 सितंबर तक केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। वहीं, 14 सितंबर को उन्हें दो सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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