विदेश की खबरें | हेगसेथ शीतयुद्ध की मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं: चीन
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

चीन ने हेगसेथ पर शीतयुद्ध की मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

हेगसेथ के बयान के बाद वाशिंगटन व बीजिंग के बीच तनाव और बढ़ गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि हेगसेथ ने शनिवार को वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन ‘शांगरी-ला डायलॉग’ में बीजिंग पर अपमानजनक आरोप लगाए।

बयान में अमेरिका पर क्षेत्र में संघर्ष और टकराव को भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की प्रतिद्वंद्विता की ओर इशारा करते हुए कहा, “हेगसेथ ने जानबूझकर क्षेत्र (एशिया) के देशों द्वारा शांति व विकास के आह्वान को नजरअंदाज किया और शांति के बजाय गुटों में टकराव के लिए शीतयुद्ध की मानसिकता को बढ़ावा दिया।”

मंत्रालय ने कहा, “अमेरिका के अलावा दुनिया में कोई भी देश एक आधिपत्य शक्ति कहलाने का हकदार नहीं है।”

चीन ने आरोप लगाया गया कि वाशिंगटन, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को भी कमजोर कर रहा है।

हेगसेथ ने शनिवार को सिंगापुर में कहा था कि अमेरिका, विदेशों में अपनी सुरक्षा को मजबूत करेगा ताकि पेंटागन, बीजिंग के तेजी से बढ़ते खतरों, खासकर ताइवान के प्रति उसके आक्रामक रुख का मुकाबला कर सके।

उन्होंने कहा था, ‘‘चीन की सेना असली जंग के लिए अभ्यास कर रही है और हम इसे यूं ही नजरअंदाज नहीं कर सकते। चीन से बढ़ता खतरा वास्तविक है। और ऐसा वास्तव में हो सकता है।’’

चीन द्वारा जारी बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि ताइवान का मामला पूरी तरह से उसका आंतरिक मामला है।

बयान में कहा गया कि अमेरिका को इस मुद्दे पर आग से नहीं खेलना चाहिए। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि वाशिंगटन ने दक्षिण चीन सागर में आक्रामक हथियार तैनात किए हैं।

चीन ने बयान में कहा कि अमेरिका, एशिया-प्रशांत में चिनगारी भड़का रहा है, तनाव पैदा कर रहा है और इस क्षेत्र को बारूद के ढेर में बदल रहा है।

सिंगापुर में चीन के दूतावास ने शनिवार को ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि हेगसेथ का भाषण ‘उकसावे’ से भरा हुआ था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)