कोलकाता, 24 मई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाला कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को चुनौती दी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को एकल पीठ के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसमें भाजपा को लोकसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन करने वाला कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किया गया। पीठ ने इसे 27 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
एकल न्यायाधीश की पीठ ने 20 मई को भाजपा को चार जून तक, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन प्रकाशित करने से रोक दिया था, जिस दिन लोकसभा चुनाव परिणाम घोषित होने वाले हैं।
अदालत ने भाजपा को उन विज्ञापनों को प्रकाशित करने से भी रोक दिया, जिनका उल्लेख पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में किया था। तृणमूल ने उसके और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ असत्यापित आरोप लगाये जाने का दावा किया था।
मामले का उल्लेख करने वाले वकील सौरभ मिश्रा ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 22 मई को आदेश पारित किया था।
पीठ ने पूछा, ‘‘आप अगली अवकाशकालीन पीठ का रुख क्यों नहीं करते?’’
वकील ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय ने भाजपा पर लोकसभा चुनाव के दौरान चार जून तक विज्ञापन जारी करने पर रोक लगा दी है।
वकील ने पीठ से कहा, ‘‘कृपया इस पर सोमवार (27 मई) को सुनवाई करें।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हम विचार करेंगे।’’
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि ‘‘लक्ष्मण रेखा’’ का पालन किया जाना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल को कोई व्यक्तिगत हमला नहीं करना चाहिए।
खंडपीठ ने 20 मई के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि भाजपा इस आदेश की समीक्षा करने या इसे वापस लेने का अनुरोध करते हुए एकल पीठ का रुख कर सकती है।
भाजपा ने यह दावा करते हुए खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की थी कि एकल पीठ ने बिना कोई सुनवाई किये आदेश पारित कर दिया।
भाजपा के वकील ने यह भी कहा था कि संविधान के तहत यह प्रावधान है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी विवाद के निवारण के लिए निर्वाचन आयोग उपयुक्त प्राधिकार है।
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