मुंबई, 15 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई में लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके के मामले से संबंधित अपीलों पर सोमवार को दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू की।
मुंबई में 11 जुलाई,2006 को किए गए आतंकवादी हमले ने शहर के पश्चिमी रेलवे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया था, जिसमें 180 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की एक विशेष पीठ दोषियों की ओर से सजा को चुनौती देने के लिये दायर अपील और राज्य सरकार द्वारा 12 दोषियों में से पांच की मौत की सजा की पुष्टि के अनुरोध पर सुनवाई करेगी। शेष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
पीठ ने सोमवार को कहा कि वह इस मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर सुबह के सत्र में करेगी और निर्देश दिया कि मामले के दोषियों को उनकी संबंधित जेलों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश किया जाए, न कि व्यक्तिगत रूप से।
निचली अदालत ने सितंबर 2015 में 12 लोगों को बम विस्फोट करने की वारदात में शामिल होने का दोषी पाया था।
कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राज्य सरकार ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय से अपील की।
दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर कीं। इससे पहले 2015 से 11 अलग-अलग पीठों के समक्ष याचिकाएं पेश की गईं, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे ने सोमवार को विस्फोट के दिन जो कुछ हुआ उसके संक्षिप्त विवरण के साथ अपनी दलीलें शुरू कीं।
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