नयी दिल्ली, 18 अप्रैल लेखक और पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने दावा किया है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद ज्ञानी जैल सिंह के मन में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने का विचार नहीं आया था।
सिंह ने ज्ञानी जैल सिंह के राष्ट्रपति काल के दिनों पर एक नई किताब लिखी है।
यहां सोमवार को पुस्तक ‘द इंडियन प्रेजिडेंट: एन इनसाइडर्स अकाउंट ऑफ द जैल सिंह इयर्स’ के विमोचन पर सिंह ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि हालात के कारण “कुछ हद तक अराजकता” की स्थिति बन गई थी।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का शव पड़ा हुआ था, विदेशी आ रहे थे और राजीव गांधी अभी तक सक्रिय रूप से प्रभारी नहीं थे।
केसी सिंह 1983-87 के दौरान ज्ञानी जैल सिंह के उपसचिव थे। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि उन्होंने (जैल सिंह ने) कभी दंगों के बाद इस्तीफा देने के बारे में सोचा था, शायद ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ के बाद यह विचार आया था जब वह अमृतसर से वापस आए थे...।”
उन्होंने कहा, “वास्तविक समय में देखें, मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह निर्धारित कर सकता है कि जिम्मेदारी कितनी अधिक थी और कौन-कौन इसमें शामिल था। हम अब भी नहीं जानते हैं, हम केवल मान सकते हैं कि उच्च पदस्थ लोग शामिल थे।”
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सिख सुरक्षाकर्मियों- बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने हत्या कर दी थी। इसके बाद हुई हिंसा में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे।
सिंह ने बताया कि “72 घंटे बाद” जब पत्रकार नरसंहार की कहानियों के साथ सामने आए तब साफ हुआ कि क्या हो रहा था और इसकी व्यापकता स्पष्ट हुई। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से 24 घंटे में दंगे को दबा दिया जाता है और यह कल्पना करना मुश्किल है कि 1984 के दंगों के इस मामले में ऐसा नहीं हुआ होगा।
उन्होंने कहा, “वह (जैल सिंह) केवल यही सोच सकते थे कि यह सिर्फ अराजकता है जो सामने आ रही है। यह शांत हो जाएगा ... और सेना को बुलाया जाएगा। अब, यह कल्पना करने के लिए कि सेना धीमी गति से आगे बढ़ेगी, मुझे नहीं लगता कि कमांडर-इन-चीफ ऐसा मानेंगे। यह माना जाता है कि नागरिक व्यवस्था भंग होने पर सेना कदम उठाएगी।”
पुस्तक विमोचन के मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा मुख्य अतिथि थे।
सिन्हा ने भारत के संविधान के संरक्षण, रक्षा और सुरक्षा में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बात करते हुए कहा कि डिजिटल समय में यह भूमिका अधिक परिभाषित हो गई है।
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