सलाया (गुजरात), 14 जून गुजरात के कच्छ जिले में तटीय क्षेत्र के लगभग 70 गांवों में से सलाया के लोग आने वाले चक्रवात बिपारजॉय के कारण सुरक्षित जगह स्थानांतरित किये जाने वालों में आखिरी होंगे।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और जिला अधिकारियों की अपीलों के अलावा, समुद्र के पानी के गांव में प्रवेश करने को देखकर वे बिपारजॉय के संभावित आगमन से एक दिन पहले अपने घरों को खाली करने के लिए राजी हुए।
मांडवी के पास स्थित सलाया गांव की आबादी 2,500 है, जिनमें ज्यादातर मछुआरे हैं।
स्थानीय निवासी भूसर याकूब तैय्यब ने कहा, ‘‘समुद्र का पानी पहले ही गांव और समुद्र के बीच की सड़क पर भर चुका है। हमें डर है कि यह हमारे गांव में आ जाएगा। हम अपने बच्चों के लिए चिंतित हैं और यही कारण है कि हमने सरकार द्वारा प्रदान किए गए सुरक्षित आश्रयों में स्थानांतरित होने का फैसला किया है।’’
एनडीआरएफ के अधिकारी राकेश सिंह बुधवार को गांव पहुंचे और स्थानीय लोगों को वहां से जाने के लिए मनाया। गत 12 जून से स्थानीय प्रशासन के प्रयासों के बावजूद, मंगलवार शाम तक केवल 150 ग्रामीणों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जा सका था।
एनडीआरएफ की टीम ने शेष ग्रामीणों को स्थानांतरित करने के कार्य का जायजा लिया, जिसके शाम तक पूरा होने की उम्मीद है।
इस दौरान मांडवी नगरपालिका की अध्यक्ष हेतल सोनेजी भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां के लोग मछुआरा समुदाय से हैं और वे समुद्र को अच्छी तरह से समझते हैं। चूंकि पानी सड़क तक पहुंच गया है, वे चक्रवात से होने वाली गंभीर क्षति को समझते हैं और आश्रयों में जाने के लिए तैयार हैं। हमने भोजन और रहने की सभी व्यवस्थाएं की हैं, वहां आराम से रहें।’’
सलाया के मछुआरा संघ के अध्यक्ष अकबर मंदरा ने कहा कि उन्हें हर चार या पांच साल में चक्रवात के कारण स्थानांतरण का सामना करना पड़ता है।
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