अहमदाबाद, पांच अगस्त गुजरात उच्च न्यायालय ने एक सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें स्कूल खुलने तक ट्यूशन फी लेने से निजी स्कूलों को रोका गया था। अदालत ने कहा कि इस तरह के आदेश से छोटे स्कूल बंद हो जाएंगे।
उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई को इस संबंध में फैसला सुनाया था। फैसले को बुधवार को वेबसाइट पर अपलोड किया गया। अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के बीच 16 जुलाई को जारी सरकारी प्रस्ताव के तीन प्रावधानों को खारिज कर दिया ।
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मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा, ‘‘बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने और स्कूल भी कायम रहें, इसके लिए दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।’’
अदालत ने कहा कि शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं देने से कई छोटे स्कूल हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे जबकि छात्रों को शिक्षा नहीं मिलने से दीर्घावधि में उनके समग्र और सामाजिक विकास पर असर पड़ेगा ।
न्यायाधीशों ने कहा कि अभिभावकों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि ऑनलाइन शिक्षा एक निरर्थक कवायद नहीं है। इसके साथ ही स्कूलों को भी इससे अवगत होना चाहिए कि अभिभावक आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।
प्रस्ताव के संबंधित प्रावधानों को खारिज करते हुए अदालत ने सरकार से संतुलन बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा ताकि अभिभावकों के साथ गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रबंधन के हितों की भी रक्षा हो ।
प्रस्ताव में ऑनलाइन शिक्षा की पेशकश करने के बावजूद ट्यूशन फी लेने पर रोक लगा दी गयी थी। निजी स्कूलों के संघ ने सरकार के आदेश को चुनौती दी ।
उच्च न्यायालय ने कहा कि स्कूल ट्यूशन फी वसूल सकते हैं ताकि वेतन, संचालन, पाठ्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों और रख-रखाव का खर्चा निकल जाए।
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