नयी दिल्ली, 29 नवंबर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) से अपील की कि वह ‘‘विदेशी सामग्री के अनियमित प्रसारण’’ के खिलाफ आगाह करने वाले ‘‘अनिष्टकर लग रहे’’ परामर्श को वापस ले, क्योंकि इसके प्रभाव परेशान करने वाले हैं।
गिल्ड ने एक बयान में कहा कि वह मीडिया को 25 नंवबर को पीसीआई द्वारा जारी ‘‘अकारण’’ परामर्श से क्षुब्ध है।
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उन्होंने कहा, ‘‘परिषद मीडिया के स्वनियमन की वकालत करता है और उसका मानना है कि किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप प्रेस की स्वतंत्रता के लिए विनाशकारी होगा, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वह ऐसे कदम को समर्थन दे रहा है, जिससे एक प्रकार की सेंसरशिप लागू होगी और ‘‘अवांछनीय’’ समझी जाने वाली सामग्री प्रकाशित करने वाले संगठनों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।’’
शनिवार को जारी बयान में कहा गया कि परामर्श में यह नहीं बताया गया कि सामग्री की पुष्टि कौन करेगा, इसे किस आधार पर सत्यापित किया जाएगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘‘अनियमित प्रसार’’ का मतलब क्या होता है।
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गिल्ड ने कहा कि देश में कई प्रकाशन विदेशी एजेंसियों, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं को लाइसेंस देते हैं और उनकी सामग्री को नये स्वरूप में प्रस्तुत करते हैं, जो कि संपादक का विशेषाधिकार होता है और जो अपने प्रकाशन में प्रकाशित हर प्रकार की सामग्री के लिए जिम्मेदार होता है।
उसने कहा कि इस स्थापित प्रक्रिया के इस स्तर पर परिषद का यह परामर्श ‘‘अनिष्टकर लगने वाला’’ प्रतीत होता है और ‘‘इसके परेशान करने वाले प्रभाव’’ होंगे।
उसने पीसीआई से अपना परामर्श तत्काल वापस लेने की अपील की।
पीसीआई ने अपने परामर्श में कहा था कि उसने विदेशी सामग्री को प्रकाशित करने में भारतीय समाचार पत्रों की जिम्मेदारी के बारे में सरकार की विभिन्न शाखाओं से मिले अनुमोदन पर विचार किया है।
परिषद ने कहा था कि उसका मानना है कि विदेशी सामग्री का अनियमित प्रसार वांछनीय नहीं है, अत: मीडिया को सलाह दी जाती है कि वह भारतीय समाचार पत्रों में विदेशी सामग्री की पुष्टि के बाद ही उसे प्रकाशित करे, क्योंकि उस समाचार पत्र के रिपोर्टर, प्रकाशक और संपादक इस सामग्री के लिए जिम्मेदार होंगे, भले ही उसका स्रोत कोई भी हो।
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